'डिजिटल डिटॉक्स' बेहद जरूरी, हमें संकल्प लेना ही होगा: भाजपा सदस्य सुमित्रा बाल्मीक
अविनाश
- 10 Feb 2026, 03:00 PM
- Updated: 03:00 PM
नयी दिल्ली, दस फरवरी (भाषा) युवाओं और बच्चों के लगातार मोबाइल फोन के इस्तेमाल को देखते हुए 'डिजिटल डिटॉक्स' के लिए संकल्प लेने, घायल पशु-पक्षियों के लिए 24 घंटे चलने वाले अस्पताल और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका चलाने वाली महिलाओं के लिए 'एक समर्पित, सरकारी, ई-कॉमर्स प्लेटफार्म'' बनाने की राज्यसभा में मंगलवार को मांग की गई।
युवाओं और बच्चों के लगातार मोबाइल फोन के इस्तेमाल का मुद्दा शून्यकाल में उठाते हुए भाजपा की सुमित्रा बाल्मीक ने कहा कि इन दिनों युवाओं में और बच्चों में बेचैनी, तनाव और अवसाद जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं का सीधा संबंध मोबाइल फोन से है।
सुमित्रा ने कहा कि सोशल मीडिया की अंतहीन 'स्क्रॉलिंग', ऑनलाइन गेम और ऑनलाइन जुआ और अश्लील सामग्री गंभीर संकट बन गए हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता के चेहरे पर एक अनकही चिंता दिखाई देती है क्योंकि मोबाइल फोन पर गतिविधि एक लत का रूप ले चुकी है।
भाजपा सदस्य के अनुसार, शोधों से पता चला है कि स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के कारण बच्चों में एकाग्रता में कमी आई है और सोचने, समझने तथा सीखने की क्षमता कम हो गई है।
उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों के अनुसार, हमारे मस्तिष्क में आनंद की अनुभूति डोपामाइन नामक रसायन के कारण होती है लेकिन इसका स्वस्थ संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। इंटरनेट के आदी लोगों के मस्तिष्क स्कैन से पता चलता है कि अत्यधिक उत्पादन के कारण डोपामाइन का स्तर कम हो जाता है।
सुमित्रा ने कहा कि अब समय आ गया है कि 'स्वच्छ भारत', 'हर घर तिरंगा' की तरह ही डिजिटल मीडिया एवं सोशल मीडिया के खिलाफ जनांदोलन चलाया जाए। ''हमें खुद यह संकल्प लेना होगा कि हम हर दिन एक तय समय तक डिजिटल मीडिया एवं सोशल मीडिया से दूर रहेंगे। सप्ताह का एक पूरा दिन भी हम इसके लिए तय कर सकते हैं।''
उन्होंने कहा ''1947 तक विकसित भारत बनने के लिए डिजिटल डिटॉक्स बेहद जरूरी है।''
भाजपा की ही धर्मशीला गुप्ता ने कहा कि नरेन्द्र मोदी सरकार ने छोटे कारोबारियों, उद्यमियों और महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए कई पहल की हैं और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं ने उल्लेखनीय काम कर अपनी आजीविका को आगे बढ़ाया है।
उन्होंने कहा कि इन महिलाओं, खास कर ग्रामीण महिलाओं के समक्ष अपने उत्पादों की व्यवस्थित बिक्री, ब्रांडिंग और उचित मूल्य हासिल करना बड़ी चुनौती है। उन्होंने सरकार से ''एक समर्पित, सरकारी, ई-कॉमर्स प्लेटफार्म'' की व्यवस्था करने और ऐसे प्लेटफार्म के संचालन के लिए प्रशिक्षित दल तैयार करने की मांग की।
बीजू जनता दल की सुलता देव ने दुर्घटना के शिकार पशु-पक्षियों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जिस तरह इन्सानों के लिए दवाओं, एंबुलेन्स और अस्पतालों की व्यवस्था होती है, उसी तरह की व्यवस्था पशु-पक्षियों के लिए की जानी चाहिए।
सुलता ने कहा ''ऐसे पशु-पक्षियों के लिए 24 घंटे सक्रिय एक फोन नंबर भी होना चाहिए। केवल यह कह देने से कुछ नहीं होता कि 'गाय हमारी मां है', बल्कि दूध देने वाली गाय अपने जीवन के अक्षम दौर में मालिकों द्वारा त्याग दी जाती है।
उन्होंने मांग की कि पशु-पक्षियों के साथ क्रूरता करने वालों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
शून्यकाल में ही भाजपा के पाका वेंकट सत्यनारायण, के एस सेल्वागनबेथी और वाईआरएस कांग्रेस पार्टी के गोला बाबूराव ने भी अपने-अपने मुद्दे उठाए।
भाषा मनीषा अविनाश
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