वीडियो को लेकर असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ वाम नेताओं की याचिका पर न्यायालय करेगा सुनवाई
माधव
- 10 Feb 2026, 01:36 PM
- Updated: 01:36 PM
नयी दिल्ली, 10 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को वामपंथी नेताओं की उस याचिका को सूचीबद्ध करने के लिए विचार करने पर सहमति जताई, जिसमें सोशल मीडिया पर प्रसारित हुए एक कथित वीडियो को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा के खिलाफ कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
इस वीडियो में शर्मा एक विशेष समुदाय के लोगों की ओर राइफल से निशाना साधते हुए नजर आ रहे हैं। हालांकि, बाद में इस वीडियो को सोशल मीडिया से हटा दिया गया।
शीर्ष अदालत ने असम में आसन्न विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा ''समस्या यह है कि चुनाव का कुछ हिस्सा उच्चतम न्यायालय में लड़ा जाता है।
भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की अगुवाई वाली पीठ ने, वकील निजाम पाशा की दलीलों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि वह याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करेगी।
पाशा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के कुछ नेताओं की ओर से पेश हुए थे।
उन्होंने पीठ के समक्ष कहा, ''हम इस अदालत से असम के मौजूदा मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए चिंताजनक बयानों और हाल में पोस्ट किए एक वीडियो को लेकर तत्काल हस्तक्षेप का अनुरोध करते हैं। इस संबंध में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं, लेकिन अब तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है।''
इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ''समस्या यह है कि जैसे ही चुनाव आते हैं, चुनाव का एक हिस्सा उच्चतम न्यायालय में लड़ा जाता है। यही समस्या है। हम मामले को देखेंगे और तारीख देंगे।''
असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा का एक कथित वीडियो भारतीय जनता पार्टी की असम इकाई ने सात फरवरी को अपने आधिकारिक 'एक्स' खाते से साझा किया था जिसमें में शर्मा को राइफल से दो लोगों की ओर निशाना साधते हुए देखा जा सकता है -जिनमें से एक ने टोपी पहनी है और दूसरे ने दाढ़ी रखी है।
इस वीडियो को लेकर व्यापक आक्रोश जताया गया और इसकी निंदा हुई थी। हिंसा और सांप्रदायिक नफरत भड़काने के आरोपों के बाद भाजपा ने पोस्ट को हटा लिया था।
भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नेता एनी राजा ने अलग-अलग याचिकाएं दायर कर शर्मा के खिलाफ कथित नफरत भरे भाषणों को लेकर प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उनके अनुसार, कथित नफरत भरे इन भाषणों का उद्देश्य सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना है।
याचिकाकर्ताओं ने यह कहते हुए उच्चतम न्यायालय से एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की भी मांग की है कि राज्य और केंद्रीय एजेंसियों से स्वतंत्र जांच की अपेक्षा नहीं की जा सकती।
याचिकाओं में शर्मा के कथित भड़काऊ भाषणों और बयानों का क्रमवार उल्लेख है।
इससे पहले, 12 लोगों द्वारा एक अलग याचिका दायर की गई थी, जिसमें संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों द्वारा विभाजनकारी टिप्पणियां करने पर रोक लगाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।
भाषा मनीषा माधव
माधव
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