हरियाणा: आतंकी आरोपी अब्दुल रहमान की फरीदाबाद जेल में हत्या
सुरेश
- 09 Feb 2026, 09:32 PM
- Updated: 09:32 PM
फरीदाबाद, नौ फरवरी (भाषा) अयोध्या में धमाका करने की साजिश में शामिल होने के आरोप में नीमका जेल में बंद 20-वर्षीय आरोपी अब्दुल रहमान की सोमवार को जेल परिसर के भीतर झड़प के बाद एक सह-कैदी ने हत्या कर दी। पुलिस ने यह जानकारी दी।
पुलिस के अनुसार, हाल में जम्मू-कश्मीर से इस जेल में स्थानांतरित किये गए अरुण चौधरी नामक एक कैदी ने रहमान की कथित तौर पर हत्या कर दी।
यह वारदात जेल के बैरक नंबर-3 के पास स्थित सुरक्षा वार्ड-3बी की चक्की नंबर-2 में रात करीब दो बजे हुई। पुलिस ने बताया कि तीखी बहस के दौरान चौधरी ने कथित तौर पर एक धारदार हथियार से रहमान पर हमला कर दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घटना के समय शोएब रियाज नामक एक तीसरा कैदी भी वहां मौजूद था। उन्होंने बताया कि आरोपी ने डराया-धमकाया और जान से मारने की धमकी दी।
फरीदाबाद पुलिस के प्रवक्ता यशपाल यादव ने बताया कि जिला जेल प्रशासन से प्राप्त शिकायत के आधार पर बल्लभगढ़ सदर थाने में आरोपी अरुण चौधरी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।
प्रवक्ता ने बताया, ''चौधरी के खिलाफ जम्मू और अमृतसर में हत्या तथा हत्या के प्रयास के आठ मामले पहले से ही दर्ज हैं। उसे अक्टूबर 2024 में कठुआ से नीमका जेल स्थानांतरित किया गया था।'' उन्होंने कहा कि मामले की जांच जारी है।
उत्तर प्रदेश के फैजाबाद जिले के मिल्कीपुर निवासी अब्दुल रहमान जून 2025 से हिरासत में था। उसे पिछले साल मार्च में गुजरात आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) और हरियाणा के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) की संयुक्त टीम ने फरीदाबाद के पास पाली गांव से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय रहमान के पास से दो हथगोले और दो मोबाइल फोन बरामद किए गए थे।
उन्होंने बताया कि रहमान के खिलाफ फरीदाबाद के डबुआ थाने में संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
सूत्रों के अनुसार, हरियाणा के विशेष कार्य बल को सूचना मिली थी कि एक 'स्लीपर सेल' अब्दुल रहमान की मदद कर रहा है और उसी ने हथगोले उपलब्ध कराए थे। बाद में बम निरोधक दस्ते ने उन हथगोलों को सुरक्षित रूप से निष्क्रिय कर दिया था।
सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान रहमान के मोबाइल फोन से कुछ आपत्तिजनक वीडियो बरामद हुए थे। इसी के साथ यह भी पता चला कि उसने कई वीडियो कथित तौर पर एक आतंकवादी संगठन के साथ साझा किए थे।
अधिकारियों ने बताया कि रहमान अयोध्या में विस्फोट करने की साजिश रचने में शामिल था। एसटीएफ के एक अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया कि उसपर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से संबंध रखने का संदेह था।
हालांकि, रहमान के माता-पिता ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा था कि वह किसी भी प्रकार की आतंकवादी गतिविधि में शामिल नहीं था।
अधिकारियों ने बताया कि आरोपी अरुण चौधरी उर्फ 'अब्बू जाट' जम्मू के आर.एस. पुरा का निवासी है। वह सांबा के रहने वाले अक्षय शर्मा की हत्या के बाद चर्चा में आया था। पंजाब में 2023 में हुई एक मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किए गए चौधरी को पहले कठुआ जेल में रखा गया था, जहां से उसे नीमका जेल स्थानांतरित किया गया।
अक्टूबर 2024 में एक विवादित घटना के बाद चौधरी को हरियाणा स्थानांतरित किया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि वह कठुआ जेल के भीतर से सोशल मीडिया पर 'लाइव' आया था और उसने आरोप लगाया था कि जेल कर्मचारियों ने उसे मोबाइल फोन तथा अन्य सुविधाएं देने के बदले रिश्वत ली थी। इस विवाद के बाद ही उसे सुरक्षा कारणों से हरियाणा की जेल में स्थानांतरित किया गया था।
जेल के एक अधिकारी ने बताया, "यह पता लगाने के लिए आंतरिक जांच जारी है कि क्या यह हत्या रहमान के कानूनी मामलों से जुड़ी थी या यह किसी व्यक्तिगत दुश्मनी का नतीजा थी।"
भाषा प्रचेता सुरेश
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