आपूर्ति विविधीकरण के जरिये ऊर्जा सुरक्षा भारत की प्राथमिकता: विदेश सचिव
अजय
- 09 Feb 2026, 08:49 PM
- Updated: 08:49 PM
नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सोमवार को कहा कि कच्चे तेल की खरीद पर भारत का दृष्टिकोण ऊर्जा प्रवाह में स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आपूर्ति के कई स्रोत बनाए रखने और उनमें विविधता लाने का रहा है।
विदेश सचिव की यह टिप्पणी अमेरिका के उस दावे के बीच आई है, जिसमें कहा गया था कि भारत रूसी कच्चे तेल का आयात बंद करने पर सहमत हो गया है।
मिसरी ने कहा कि कच्चे तेल की खरीद के संबंध में भारत के निर्णयों के लिए राष्ट्रीय हित 'मार्गदर्शक कारक' होगा और ऊर्जा नीति के प्रमुख चालक पर्याप्त उपलब्धता, उचित मूल्य निर्धारण और आपूर्ति की विश्वसनीयता हैं।
उनके इस बयान को इस संकेत के रूप में देखा जा रहा है कि नयी दिल्ली द्वारा रूस के साथ अपने ऊर्जा संबंधों को अचानक तोड़ने की संभावना नहीं है।
विदेश सचिव ने संवाददाता सम्मेलन में रूसी कच्चे तेल की खरीद बंद करने के सवाल पर कहा, ''हमारी सबसे पहली प्राथमिकता भारतीय उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करना और यह सुनिश्चित करना है कि उन्हें सही कीमत पर तथा विश्वसनीय और सुरक्षित आपूर्ति के माध्यम से पर्याप्त ऊर्जा मिले।''
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा के मामले में हमारी आयात नीति पूरी तरह से इन्हीं उद्देश्यों से प्रेरित है। उन्होंने कहा, ''हम इसके लिए किसी एक स्रोत पर निर्भर नहीं हैं और न ही ऐसा करने का हमारा इरादा है। वस्तुनिष्ठ बाजार स्थितियों के आधार पर समय-समय पर स्रोतों के मिश्रण में बदलाव होना स्वाभाविक है। हमारा दृष्टिकोण आपूर्ति के कई स्रोतों को बनाए रखना और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए उनमें उचित विविधीकरण करना है। इस क्षेत्र में हम जितने अधिक विविध होंगे, उतने ही सुरक्षित होंगे।''
गौरतलब है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह भारत के साथ व्यापार समझौते की घोषणा करते हुए दावा किया था कि भारत, रूस से कच्चा तेल नहीं खरीदने पर सहमत हो गया है। ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश के जरिये भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत के अतिरिक्त शुल्क को वापस ले लिया है, जो उन्होंने पिछले अगस्त में रूस से तेल खरीदने के कारण लगाया था।
अमेरिकी आदेश में यह भी कहा गया कि वह निगरानी करेगा कि भारत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूसी तेल की खरीद फिर से शुरू करता है या नहीं, और इसी आधार पर तय होगा कि 25 प्रतिशत शुल्क फिर से लगाया जाए या नहीं।
मिसरी ने कहा कि भारत न केवल ऊर्जा के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से एक है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक स्थिर कारक के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने बताया कि यही कारण है कि भारत दर्जनों देशों से कच्चा तेल आयात करता है।
मिसरी ने भारत के नजरिये को विस्तार से समझाते हुए कहा कि तेल और गैस क्षेत्र में देश एक शुद्ध आयातक है और एक विकासशील अर्थव्यवस्था होने के नाते हमें अपने संसाधनों की उपलब्धता के प्रति सचेत रहना होगा।
उन्होंने कहा, ''स्वाभाविक रूप से, जब आप किसी आयातित संसाधन पर 80-85 प्रतिशत तक निर्भर होते हैं, तो आपको ऊर्जा लागत के कारण होने वाली मुद्रास्फीति की आशंका के बारे में चिंतित होना पड़ता है।''
विदेश सचिव ने जोर देकर कहा, ''मैं दृढ़ता और विश्वास के साथ कह सकता हूं कि चाहे सरकार हो या हमारा व्यवसाय, अंत में हमारे विकल्पों के लिए राष्ट्रीय हित ही मार्गदर्शक कारक होंगे।''
भाषा पाण्डेय अजय
अजय
0902 2049 दिल्ली