अनुकंपा नियुक्ति अधिकार नहीं बल्कि अपवाद: सीआईसी
नरेश
- 09 Feb 2026, 07:55 PM
- Updated: 07:55 PM
(मोहित सैनी)
नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि सरकारी विभागों में अनुकंपा के आधार पर दी जाने वाली नौकरियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रशासन से जुड़ी गंभीर कमियां हैं और चेतावनी दी कि निर्णय लेने की अपारदर्शी प्रक्रिया और अस्पष्ट नीतियां विवादों, मुकदमों और देश भर में आरटीआई आवेदनों में लगातार वृद्धि को बढ़ा रही हैं।
लोक प्रशासन के लिए व्यापक निहितार्थों वाले एक आदेश में, आयोग ने लखनऊ स्थित केंद्रीय जीएसटी और केंद्रीय उत्पाद शुल्क विभाग को अनुकंपा नियुक्ति मामले में जांच समिति के रिकॉर्ड का खुलासा करने का निर्देश दिया और इस बात पर जोर दिया कि इस तरह की प्रक्रियाओं को लेकर गोपनीयता जवाबदेही को कमजोर करती है।
सूचना आयुक्त विनोद कुमार तिवारी ने कहा कि एक बार जब कोई विभाग यह स्वीकार कर लेता है कि किसी मामले का परीक्षण विभागीय जांच समिति (डीएससी) द्वारा किया गया है, तो उस प्रक्रिया के रिकॉर्ड सूचना का अधिकार अधिनियम (आरटीआई) अधिनियम के दायरे में पूरी तरह से आ जाते हैं।
आयोग ने कहा, "एक बार यह स्वीकार कर लिया जाए कि अपीलकर्ता के मामले पर विभागीय जांच समिति द्वारा विचार किया गया था, तो ऐसे विचार-विमर्श से संबंधित रिकॉर्ड, जिसमें बैठक का ब्यौरा और अंकन प्रणाली के आधार पर तैयार की गई योग्यता सूची शामिल है, आरटीआई अधिनियम की धारा 2(एफ) के तहत 'सूचना' मानी जाएगी।"
सीआईसी ने कहा कि विभाग अस्पष्ट जवाब देकर पारदर्शिता संबंधी दायित्वों को पूरा नहीं कर सकते।
इसने कहा है, "प्रासंगिक रिकॉर्ड, विशेष रूप से योग्यता सूची का खुलासा किए बिना केवल यह कहना कि अपीलकर्ता के नाम पर विचार किया गया और उसकी सिफारिश नहीं की गई, आरटीआई अधिनियम के तहत पारदर्शिता के दायित्व को पूरी तरह से पूरा नहीं करता है।"
आयोग ने कहा कि अनुकंपा के आधार पर की जाने वाली नियुक्तियां सामान्य भर्ती प्रक्रिया के अपवाद के रूप में होती हैं और यह स्पष्ट मानदंडों की कमी, असंगत मूल्यांकन और अभिलेखों का खुलासे न करने के कारण विवाद का स्रोत बनती जा रही हैं।
इसने कहा कि यह अपारदर्शिता "आवेदकों को निर्णय लेने की प्रक्रिया को समझने से रोकती है" और सार्वजनिक संस्थानों में विश्वास को कमजोर करती है।
तीसरे पक्ष की निजी जानकारी से जुड़ी चिंताओं को मानते हुए भी सीआईसी ने कहा कि सरकारी दफ्तरों में रियायती या अनुकंपा के आधार पर दी गई नियुक्तियों को भी सार्वजनिक जांच के दायरे में आना चाहिए।
आयोग ने बताया कि अदालतें प्रतियोगी परीक्षाओं से मिली नौकरियों में भी वर्गवार योग्यता सूची सार्वजनिक करने को सही ठहरा चुकी हैं, इसलिए केवल अनुकंपा नियुक्ति होने के कारण पारदर्शिता कम नहीं की जा सकती।
आयोग ने विभाग को निर्देश दिया कि वह आवेदक के मामले तक सीमित रहते हुए, विभिन्न मापदंडों के लिए दिए गए अंकों के आधार पर तैयार की गई योग्यता सूची सहित, डीएससी बैठकों का ब्यौरे की प्रमाणित प्रतियां तीन सप्ताह के भीतर उपलब्ध कराए।
व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण अपनाते हुए सीआईसी ने आवेदकों के बीच यह आम धारणा बनती जा रही है कि अनुकंपा नियुक्ति उनका अधिकार है।
आयोग ने कहा, "अनुकंपा नियुक्ति कोई निहित अधिकार नहीं है, बल्कि सामान्य भर्ती प्रक्रिया का एक अपवाद है।" इसका उद्देश्य केवल दिवंगत कर्मचारी के उस परिवार को तत्काल राहत देना है, जो उसकी मृत्यु के बाद अत्यंत आर्थिक संकट में आ गया हो।
आरटीआई अधिनियम की धारा 25(5) के तहत अपनी सलाहकारी शक्तियों का प्रयोग करते हुए, तिवारी ने विभागों से अन्य जगहों की सर्वोत्तम प्रथाओं से सीख लेकर अपनी अनुकंपा नियुक्ति नीतियों की समीक्षा और संशोधन करने को कहा।
भाषा नोमान नरेश
नरेश
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