बजट वास्तविक स्थिति से बिल्कुल उलट है : रास में विपक्ष ने कहा
वैभव
- 09 Feb 2026, 06:24 PM
- Updated: 06:24 PM
नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) सरकार पर बजट में बड़ी-बड़ी घोषणाएं करने तथा उसके अनुकूल काम न करने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस के एक सदस्य ने सोमवार को राज्यसभा में दावा किया कि बजट का वास्तविक स्थिति से कोई लेना देना नहीं है।
उच्च सदन में बजट 2026-27 पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस के रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, ''बजट का वास्तविक स्थिति से कोई लेना देना नहीं है, शायद इसीलिए इस बजट को 'खोदा पहाड़ निकली चुहिया' कहा जा रहा है।
उन्होंने कहा, ''यह बजट गांव, गरीब, सामाजिक न्याय की हकमारी का बजट है क्योंकि वे लोग पूरी तरह उपेक्षित हैं। पिछले साल वित्त मंत्री ने कई तरह के मिशन, मखाना बोर्ड और नमो ड्रोन दीदी की बात की। इन सभी मिशन की इस बजट में कोई चर्चा नहीं हुई।''
सुरजेवाला ने कहा कि मखाना बोर्ड बनाने की घोषणा ही साढ़े सात महीने बाद हुई, 13 दिसंबर 2025 को इसकी पहली बैठक हुई और उसके बाद बजट में उसके लिए कुछ नहीं कहा गया। उन्होंने कहा कि इसी तरह नमो ड्रोन दीदी को 676 करोड़ रुपये में से केवल 100 करोड़ रुपये दिए, 576 करोड़ रुपये दिए ही नहीं गए।
उन्होंने कहा कि किसानों को सरकार ने केवल आश्वासन दिए हैं, उनकी समस्याएं हल नहीं कीं। उन्होंने आरोप लगाया, ''अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में तो सरकार ने किसानों और गरीबों की बलि चढ़ा दी है।''
बजट पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए समाजवादी पार्टी (सपा) की जया बच्चन ने कहा कि वह फिल्म उद्योग से आती हैं और यह उद्योग सबसे अधिक आयकर तथा जीएसटी देता है।
उन्होंने कहा, ''बजट में इस उद्योग को राहत की उम्मीद थी। देश की अर्थव्यवस्था में फिल्म उद्योग का बहुत बड़ा योगदान होता है। फिल्म उद्योग के विकास के लिए और इसकी समस्याएं कम करने के लिए कुछ तो राहत हमें दी जानी चाहिए थी।''
उन्होंने जानना चाहा कि 3.1 करोड़ बेरोजगार युवकों के लिए रोजगार सृजन के वास्ते कितना धन बजट में आवंटित किया गया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए बड़े- बड़े वादे किए गए थे। उन्होंने पूछा कि 7.6 फीसदी शिक्षित महिलाओं के लिए बजट में क्या प्रावधान किए गए हैं।
जया ने कहा, ''वरिष्ठ नागरिकों की बात करें तो ये समाज के स्तंभ होते हैं। 60 से 79 साल के बुजुर्ग को 200 रुपये प्रतिमाह और 80 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों को 500 रुपये प्रतिमाह की पेंशन इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना के तहत दी जाती है। इस तरह से भारत का विकास नहीं होने वाला। मैंने पिछले साल भी यह कहा था। इस बार भी दोहरा रही हूं।''
नेशनल कॉन्फ्रेंस के चौधरी मोहम्मद रमजान ने सरकार से जानना चाहा कि पिछले साल भी केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर का बजट 46 हजार करोड़ रुपये रखा गया था, इस बार भी इतना ही है जबकि अन्य राज्यों के बजट में 12 से 18 फीसदी की वृद्धि की गई है।
उन्होंने कहा, ''हमारी मांग है कि यह बजट बढ़ाया जाना चाहिए। जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेश में विभाजित करते समय कई तरह के लुभावने सपने दिखाए गए थे और कश्मीरी पंडितों को पुन: बसाने का भी वादा किया था। सरकार को अपने वादे पूरे करने चाहिए। पांच लाख नौकरियां देने का वादा भी अधूरा ही है।''
उन्होंने सरकार से सवाल किया, ''क्या जम्मू कश्मीर से आतंकवाद खत्म हो गया? जम्मू कश्मीर के लोग आतंकवाद की निंदा करते हैं, लेकिन आतंकवाद का दंश भी सहते हैं।''
चौधरी ने कहा, ''डल झील के पास अभयारण्य के लिए जमीन ली जा रही है। ऐसा हुआ तो डल झील का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा।''
आम आदमी पार्टी के डॉ अशोक कुमार मित्तल ने कहा, ''देश की अर्थव्यवस्था और इस बजट में विरोधाभास हैं। अगर भारत चौथी बड़ी अर्थव्यवस्था है तो देश में बड़ी संख्या में लोग बेरोजगार क्यों हैं? अगर 2024-25 में भारत की जीडीपी 6.5 फीसदी थी तो आम आदमी को इसका लाभ क्यों नहीं हो पा रहा है?''
मित्तल ने कहा कि अगर 25 करोड़ लोगों को सरकार गरीबी रेखा से बाहर निकालने का दावा करती है तो 80 करोड़ लोगों को मुफ्त अनाज देने का क्या औचित्य है?
उन्होंने कहा, ''अमेरिका ने पहले शुल्क 25 फीसदी किया और अब 18 फीसदी किया। इसमें राहत की बात कहां है? रूस से तेल आएगा या नहीं, इस पर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है।''
मित्तल ने दावा किया कि बीते बरस भीषण बाढ़ का सामना करने वाले पंजाब के लिए इस बजट में कुछ भी नहीं दिया गया।
बजट पर चर्चा में तृणमूल कांग्रेस के सदस्य जी के वासन, बीजू जनता दल के निरंजन बिशी, अन्नाद्रमुक के एम धनपाल और मनोनीत सदस्य मीनाक्षी जैन ने भी हिस्सा लिया। चर्चा अधूरी रही।
भाषा
मनीषा माधव वैभव
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