ओडिशा के लिए निराशाजनक बजट, एक बार फिर राज्य की अनदेखी हुई : बीजद
माधव
- 09 Feb 2026, 05:43 PM
- Updated: 05:43 PM
नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) राज्यसभा में सोमवार को बीजू जनता दल (बीजद) के सदस्य मुजीबुल्ला खान ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि अगले वित्तवर्ष का बजट ओडिशा के लिए निराशाजनक है और एक बार फिर केंद्र ने राज्य की अनदेखी की है।
उच्च सदन में वित्त वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए बीजद सदस्य ने कहा कि बजट में कई घोषणाएं की गईं लेकिन उनमें ओडिशा को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने 'स्पीड रेल कॉरिडोर' का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भी उनके राज्य को शामिल नहीं किया गया। इसी प्रकार बौद्ध सर्किट में भी ओडिशा की अनदेखी की गयी।
उन्होंने कहा कि ओडिशा खनिज के मामलों में समृद्ध है और सबसे अच्छा कोयला उनके प्रदेश में ही मिलता है लेकिन पिछले 10 साल में कोयले की रॉयल्टी में कोई वृद्धि नहीं की गई है।
खान ने राज्य में मक्का प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाने की भी मांग की।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के ए.डी. सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार बड़े पैमाने पर बैंक ऋणों को बट्टे खाते में डाल रही है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र में लोगों की क्रय शक्ति बढ़ाने पर जोर देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मनरेगा के स्थान पर लाए गए नए कानून के लिए केंद्र की आलोचना करते हुए कहा कि नए कानून में 40 प्रतिशत खर्च राज्यों को उठाने का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने खेतों में यूरिया के अत्यधिक इस्तेमाल पर चिंता जतायी और कहा कि यह खतरनाक स्थिति है। उन्होंने कहा कि उवर्रकों के अत्यधिक इस्तेमाल से मिट्टी के साथ ही पानी भी प्रदूषित होता है और इसका दीर्घकालिक असर भी होता है।
चर्चा में भाग लेते हुए अन्नाद्रमुक सदस्य एम थंबीदुरै ने बजट के विभिन्न प्रावधानों का स्वागत किया और तमिलनाडु सरकार की तीखी आलोचना की।
मनोनीत सुधा मूर्ति ने लगातार नौवां बजट पेश करने के लिए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बधाई दी। बजट का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे अच्छा और आत्मविश्वास से भरा बताया। उन्होंने कहा कि मजबूत नेता, वित्तीय स्थिरता सहित विभिन्न वजहों से विश्व में भारत की छवि काफी अच्छी हुई है। इस क्रम में उन्होंने अपनी दो अमेरिका यात्राओं का जिक्र किया।
सुधा मूर्ति ने कहा कि पहली बार जब वह अमेरिका के दौरे पर गई थीं तब उन्हें अपमानजनक सवालों का सामना करना पड़ा था और उस समय भारत की छवि अच्छी नहीं थी। इसी क्रम में उन्होंने अपनी हालिया अमेरिका यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि अब समय काफी बदल गया है और इस बार न सिर्फ उन्हें सुखद अनुभव हुआ बल्कि उन्होंने महसूस किया कि देश की छवि अब अमेरिकी लोगों में काफी बदल चुकी है।
भाषा अविनाश माधव
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