जम्मू-कश्मीर विधानसभा में हंगामा, भाजपा ने सदन से बहिर्गमन किया
प्रशांत
- 09 Feb 2026, 08:53 PM
- Updated: 08:53 PM
जम्मू, नौ फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर विधानसभा में सोमवार को पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के विधायक वहीद उर रहमान पारा ने सरकार पर पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता (एसएएससीआई) योजना लाकर केंद्र शासित प्रदेश को कर्ज के जाल में धकेलने का आरोप लगाया, जिसके बाद हंगामा शुरू हो गया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) ने पारा का विरोध किया, जिसकी वजह से दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई।
पारा के साथ उनके पार्टी सहयोगी और निर्दलीय विधायक शेख खुर्शीद भी थे। विधानसभा अध्यक्ष मुबारक गुल ने स्थिति को नियंत्रित करने के कई प्रयास किए और अंततः पहले सत्र के निर्धारित समय से आधे घंटे पहले सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया।
हंगामे के दौरान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य अपनी सीट से उठकर सदन से बाहर चले गए और अध्यक्ष पर आरोप लगाया कि उन्होंने पार्टी सदस्यों को बजट पर बोलने का समय नहीं दिया।
भाजपा के कुछ सदस्यों ने आसन के समीप जाने की कोशिश भी की, लेकिन मार्शलों ने उन्हें वापस भेज दिया।
पीडीपी विधायक पारा ने सरकार पर निशाना साधते हुए जम्मू-कश्मीर को कर्ज के जाल में धकेलने का आरोप लगाया।
पारा ने बजट पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा, "मुख्यमंत्री (उमर अब्दुल्ला) और नेकां विधायक केंद्र शासित प्रदेश में पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना लाने का दावा कर रहे हैं। यह कोई कल्याणकारी योजना नहीं, बल्कि एक कर्ज का जाल है, जिसके जरिए आप जम्मू-कश्मीर को उद्योगपतियों के हाथों गिरवी रख रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "आप बाजार से ऋण ले रहे हैं, जो विनाश के समान है और एक बेहद खतरनाक मिसाल कायम करता है।"
पारा ने कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 के कुछ प्रावधानों को निरस्त किये जाने के बाद जम्मू-कश्मीर के हितों की रक्षा करने और पूर्ववर्ती राज्य को उसके सभी सुरक्षा उपायों के साथ पुनः प्राप्त करने की दिशा में काम करने के लिए नेकां को भारी जनादेश मिला था।
उन्होंने कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि उस जनादेश का सम्मान करने के बजाय आप (नेकां सरकार) आज पूरे जम्मू-कश्मीर को बेच रहे हैं।"
पारा ने मुख्यमंत्री से इस योजना पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया और चेतावनी दी कि जम्मू-कश्मीर को "श्रीलंका और पाकिस्तान जैसे विफल देशों" जैसी स्थिति में नहीं धकेला जाना चाहिए।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने पलटवार करते हुए आरोपों को खारिज कर दिया और विपक्षी नेताओं पर 'जनता को खुश करने' और विकास के लिए बनाई गई वित्तीय सहायता योजना का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया।
जब अध्यक्ष स्थिति को शांत करने की कोशिश कर रहे थे और नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक सदस्य को बोलने के लिए कह रहे थे, तभी भाजपा ने आपत्ति जताई व उसके सदस्यों ने आसन के समीप जाने की कोशिश की।
भाजपा सदस्यों ने आरोप लगाया कि उन्हें बोलने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया जा रहा है और बाद में वे सदन से बहिर्गमन कर गए।
गुल ने हंगामा जारी रहने पर सदन की कार्यवाही को निर्धारित समय से आधे घंटे पहले अपराह्न ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुख्य प्रवक्ता और विधायक तनवीर सादिक ने बाद में सदन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए पारा पर सदन को गुमराह करने व कार्यक्रम की समझ न होने का आरोप लगाया। सादिक ने यह भी दावा किया कि पीडीपी नेता माइक लेकर घूम रहे थे।
उन्होंने इस कृत्य की जांच की मांग की।
सादिक ने दिन की कार्यवाही समाप्त होने पर कहा कि यह योजना एक दीर्घकालिक वित्तपोषण व्यवस्था है, जिसे चुकाने की अवधि 50 वर्ष तक है और इसका उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में निर्माण व अवसंरचना विकास को गति देना है।
उन्होंने 'कर्ज के जाल' के आरोप को खारिज करते हुए दलील दी कि अगर यह योजना हानिकारक होती, तो देश भर के अन्य राज्य इसे नहीं अपनाते।
प्रवक्ता ने पिछले बजट अनुमानों को लेकर विपक्ष पर भी निशाना साधा और आरोप लगाया कि पहले आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर पेश किए गए थे।
उन्होंने कहा कि अब विकास को यथार्थवादी और सुनियोजित तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। सादिक ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोग सभी क्षेत्रों में विकास चाहते हैं और यह योजना बुनियादी ढांचे को महानगरीय मानकों तक उन्नत करने में मदद करेगी।
भाषा जितेंद्र प्रशांत
प्रशांत
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