बाइक सवार की मौत मामला: दुर्घटना की सूचना अधिकारियों को न देने का आरोपी उप-ठेकेदार गिरफ्तार
माधव
- 07 Feb 2026, 09:38 PM
- Updated: 09:38 PM
(फोटो के साथ)
नयी दिल्ली, सात फरवरी (भाषा) दिल्ली के जनकपुरी इलाके में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) द्वारा खोदे गए गड्ढे में बाइक सवार के गिरने की घटना की जानकारी होने के बावजूद इसे छिपाने के आरोपी उप-ठेकेदार को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के एक अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि घटना को छिपाने के प्रयास के पास के कारण पुलिस और आपातकालीन प्रतिक्रिया में देरी हुई।
पुलिस ने बताया कि खुदाई के काम से जुड़े अधिकारियों को सड़क के बीचोंबीच बने लगभग 15 फुट गहरे गड्ढे से उत्पन्न खतरे की जानकारी थी, फिर भी उन्होंने घटनास्थल पर बैरिकेडिंग या चेतावनी चिह्न लगाने जैसे बुनियादी सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित नहीं किया।
पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) दराडे शरद भास्कर ने बताया कि जांच से ज्ञात हुआ कि इस मामले की जानकारी पुलिस के संज्ञान में आने से कई घंटे पहले ही राजेश कुमार प्रजापति (47) को पता था कि कोई व्यक्ति गड्ढे में गिर गया है।
पुलिस के अनुसार, एक प्रत्यक्षदर्शी विपिन सिंह, जो एक शादी में शामिल होने के बाद सागरपुर स्थित अपने घर लौट रहे थे, ने देखा कि एक मोटरसाइकिल खाई में गिर गई है और उन्होंने पास के एक गैरेज के सुरक्षा गार्ड को इसकी सूचना दी।
पुलिस अधिकारी ने बताया, ''गार्ड ने तुरंत योगेश नामक एक मजदूर को सूचित किया, जिसने खाई में झांका और पाया कि मोटरसाइकिल की हेडलाइट जल रही थी और अंदर एक व्यक्ति दिखाई दे रहा था।''
पुलिस ने बताया कि फोन पर बातचीत के रिकॉर्ड से पता चला कि योगेश ने रात करीब 12:22 बजे प्रजापति को घटना की जानकारी दी, जिसके बाद वह 15-20 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच गया।
हालांकि, प्रजापति ने उस समय न तो पुलिस को और न ही किसी आपातकालीन प्राधिकरण को सूचना दी। भास्कर ने बताया कि घटना की जानकारी पुलिस को अगली सुबह करीब आठ बजे मिली।
पुलिस ने बताया कि त्रि नगर में रहने वाले बी.कॉम स्नातक प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया गया है और उत्तर प्रदेश निवासी योगेश का पता लगाने के लिए कई टीम भेजी गई हैं।
प्राथमिकी में कहा गया है कि प्रोफेसर जोगिंदर सिंह मार्ग पर आंध्र स्कूल के पास डीजेबी और उसके ठेकेदार द्वारा गड्ढा खोदा गया था और सड़क उपयोगकर्ताओं को सचेत करने के लिए किसी भी सुरक्षा व्यवस्था के बिना उसे खुला छोड़ दिया गया था।
प्राथमिकी में कहा गया है, ''सड़क के बीचोंबीच गड्ढा खोदे जाने के बावजूद वहां कोई बैरिकेडिंग, कोई चेतावनी चिह्न या सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं था।''
दुर्घटना के बाद किए गए मौके के निरीक्षण से पता चला कि संबंधित अधिकारियों को खुदाई के काम की जानकारी थी, लेकिन वे बुनियादी सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने में विफल रहे।
प्राथमिकी में कहा गया है, ''घटनास्थल के निरीक्षण से स्पष्ट है कि गड्ढे को बिना किसी सुरक्षा उपाय के खुला छोड़ दिया गया था, जिससे यात्रियों के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया था।''
मृतक के परिवार की वकील आस्था चतुर्वेदी ने आरोप लगाया कि सीसीटीवी फुटेज सहित महत्वपूर्ण सबूत जुटाने में पुलिस द्वारा देरी की गई।
उन्होंने कहा कि बैरिकेड और पर्याप्त रोशनी की कमी से स्पष्ट लापरवाही के लिए डीजेबी और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।
चतुर्वेदी ने दावा किया कि मृतक के परिवार को अभी तक किसी भी अधिकारी के निलंबन की सूचना नहीं दी गई है। उन्होंने जांच की धीमी गति पर भी चिंता जताई और आरोप लगाया कि घटना के 24 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी घटनास्थल से जुड़ी सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराई गई है।
उन्होंने कहा, ''अगर रिकॉर्डिंग साझा नहीं की जाएगी, तो हमें कैसे पता चलेगा कि दुर्घटना कैसे हुई?'' जनकपुरी निवासी जसप्रीत सिंह ने आरोप लगाया कि सुरक्षा उपाय घातक दुर्घटना के बाद ही लागू किए गए।
उन्होंने कहा, ''यह एक दिन का मामला नहीं है। लड़के की मौत के बाद ही अधिकारियों को अचानक बैरिकेड लगाने की याद आई। इससे पहले न तो कोई संकेतक था और न ही बैरिकेड लगे थे।''
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के अनुसार, पीड़ित परिवार को जल्द ही 10 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाने की संभावना है।
इस घटना के मद्देनजर, दिल्ली सरकार ने डीजेबी के अभियंताओं को सभी निर्माणाधीन स्थलों का दौरा करने और शनिवार शाम तक सुधारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया है।
डीजेबी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ''निर्माण स्थालों का दौरा किये जाने का काम जारी है, अभियंताओं को सभी निर्माणाधीन स्थलों पर कमियों की पहचान करने और शाम तक सुधारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया गया है।''
दिल्ली के शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने शनिवार को कहा कि सरकार ने घटना के संबंध में लापरवाही के संदेह में दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) के तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद सूद ने कहा कि मामले की व्यापक जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है।
सूद ने कहा, ''जल मंत्री के मार्गदर्शन में तत्काल कार्रवाई की गई और मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद उन सभी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है जिनपर लापरवाही बरतने का संदेह है।''
पुलिस ने बताया कि घटनाक्रम का सटीक पता लगाने के लिए इलाके के सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण किया जा रहा है।
कैलाशपुरी निवासी और एक निजी बैंक के कर्मचारी कमल ध्यानी जब घर लौट रहे थे तभी वह सीवर पाइपलाइन परियोजना के लिए खोदे गए लगभग 15 फुट गहरे गड्ढे में गिर गए।
पुलिस ने बताया कि पीड़ित के परिवार ने पहले कई अस्पतालों में उनकी तलाश की, लेकिन दुर्घटना के किसी भी मामले का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला।
मोबाइल फोन की लोकेशन के आधार पर परिवार और पुलिसकर्मियों ने बाद में जनकपुरी इलाके में कई घंटों तक खोजबीन की जिसके बाद घटनास्थल का पता चला।
ठेकेदार और दिल्ली जल बोर्ड के संबंधित अधिकारियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या) के तहत जनकपुरी थाने में एक प्राथमिकी पहले ही दर्ज की जा चुकी है।
पुलिस ने कहा कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। घटना के बाद से लापता ठेकेदार और मजदूरों समेत अन्य लोग भी इस मामले में जांच के दायरे में हैं। पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट रविवार को आएगी।
इस मामले के संबंध में शुक्रवार रात को डीजेबी के तीन अभियंताओं को निलंबित कर दिया गया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जनकपुरी जैसी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए आठ सूत्रीय सुरक्षा प्रारूप जारी किया है। उन्होंने शहर में खुदाई स्थलों की सूची तीन दिनों के भीतर मांगी है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक बयान में कहा गया है कि शुक्रवार को पश्चिमी दिल्ली के जनकपुरी इलाके में हुई दुखद दुर्घटना को "गंभीर" मानते हुए मुख्यमंत्री ने सभी विभागों और कार्यकारी एजेंसियों को तत्काल और समयबद्ध कार्रवाई का आदेश दिया है ताकि ऐसी घटना दोबारा न हो।
इसमें कहा गया है, ''खुदाई और उत्खनन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था में खामियों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने सुरक्षा मानदंडों को सख्ती से लागू करने का निर्देश दिया है और अधिकारियों और ठेकेदारों के लिए स्पष्ट जवाबदेही तय की है।
संतोष माधव
माधव
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