मेघालय में 'अवैध' कोयला खदान में विस्फोट, 18 मजदूरों की मौत और कई अन्य के फंसे होने की आशंका
संतोष
- 06 Feb 2026, 12:05 AM
- Updated: 12:05 AM
शिलांग, पांच फरवरी (भाषा) मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले में बृहस्पतिवार को ''अवैध'' कोयला खदान में विस्फोट होने से कम से कम 18 मजदूरों की मौत हो गई और कई अन्य के फंसे होने की आशंका है। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
सरकार ने घटना की जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) आई नोंगरंग ने बताया कि यह घटना थांगस्कू इलाके में हुई और बचाव दल तलाशी अभियान चला रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कोयला खदान में हुए विस्फोट के कारण मजदूरों की मौत होने पर शोक जताया और मृतकों के परिजन को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की।
मोदी ने घोषणा की कि प्रत्येक मृतक के परिजन को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (पीएमएनआरएफ) से दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी, जबकि घायल व्यक्ति को 50 हजार रुपये दिए जाएंगे।
प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने 'एक्स' पर एक पोस्ट में मोदी के हवाले से कहा, "ईस्ट जयंतिया हिल्स, मेघालय में हुई दुर्घटना के बारे में जानकर दुख हुआ। अपने प्रियजन को खोने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। घायल व्यक्ति के जल्द स्वस्थ होने की कामना करता हूं।"
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने इस घटना पर दुख जताया और मामले की जांच की घोषणा की।
ईस्ट जयंतिया हिल्स के पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने बताया कि बचाव अभियान के दौरान अब तक 18 शव बरामद किए गए हैं।
कुमार ने बताया कि घटना में घायल एक व्यक्ति को एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जिसके बाद बेहतर इलाज के लिए उसे राज्य की राजधानी शिलांग रेफर कर दिया गया।
डीजीपी ने कहा, ''विस्फोट के समय खदान के अंदर मौजूद लोगों की संख्या के बारे में सटीक जानकारी नहीं है। कई लोगों के फंसे होने की आशंका है।''
कुमार ने कहा कि विस्फोट उम्प्लेंग पुलिस आउटपोस्ट के अंतर्गत थांगस्कू क्षेत्र के म्यनसिंगाट में स्थित एक अवैध कोयला खदान में विस्फोट हुआ।
उन्होंने बताया कि विस्फोट की सूचना सुबह मिली, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारी और अन्य कर्मी मौके पर पहुंचे। जांच के बाद पुष्टि हुई कि अवैध कोयला खदान के अंदर विस्फोट हुआ है और कई लोगों के फंसे होने की आशंका है।
पुलिस के अनुसार, घटनास्थल पर राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और विशेष बचाव दल (एसआरटी) की टीम तैनात कर दी गई हैं तथा तलाश और बचाव अभियान जारी है।
एसपी ने बताया कि इस घटना के संबंध में ख्लिएह्रियात पुलिस थाने में स्वत: संज्ञान लेते हुए प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला भारतीय न्याय संहिता, खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम तथा विस्फोटक पदार्थ अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया और व्यापक जांच के आदेश दिए।
उन्होंने एक बयान में कहा, "पूर्वी जयंतिया हिल्स में हुई कोयला खदान दुर्घटना के बारे में जानकर बहुत दुख हुआ। इस दुर्भाग्यपूर्ण त्रासदी में अपने प्रियजन को खोने वाले परिवारों के प्रति गहरी संवेदनाएं प्रकट करता हूं।"
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोगों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मेघालय उच्च न्यायालय ने भी घटना से जुड़ी खबरों का स्वत: संज्ञान लिया और अधिकारियों को कथित अवैध खनन गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
अदालत ने पूर्वी जयंतिया हिल्स के उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को खदान मालिकों और संचालकों की पहचान करके उन्हें गिरफ्तार करने तथा अवैध खनन से जुड़ी सामग्री जब्त करने का आदेश दिया।
साथ ही, दोनों अधिकारियों को नौ फरवरी को की गई कार्रवाई का विवरण लेकर व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने को कहा गया है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने वर्ष 2014 में पर्यावरण को होने वाले नुकसान और सुरक्षा जोखिमों का हवाला देते हुए मेघालय में 'रैट-होल' तकनीक से कोयला खनन और अन्य अवैज्ञानिक खनन तरीकों पर प्रतिबंध लगाया था, साथ ही ऐसे तरीकों से निकाले गए कोयले की अवैध ढुलाई पर भी रोक लगाई गई थी।
'रैट-होल' खनन में संकरी सुरंग खोदी जाती हैं, जो आमतौर पर 3-4 फुट ऊंची होती हैं। मजदूर इनमें घुसकर कोयला निकालते हैं। ये क्षैतिज सुरंगें इतनी संकरी होती हैं कि एक समय में केवल एक व्यक्ति ही अंदर जा सकता है, इसलिए इन्हें "रैट-होल" कहा जाता है।
बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी इस प्रतिबंध को बरकरार रखा और केवल वैज्ञानिक, नियंत्रित प्रक्रियाओं तथा पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों के साथ ही खनन की अनुमति दी।
भाषा जोहेब संतोष
संतोष
0602 0005 शिलांग