न्यायालय ने आदेश में संशोधन किया, अनुराग बीसीसीआई की गतिविधियों में भाग लेने के लिये स्वतंत्र
सुरेश
- 05 Feb 2026, 05:52 PM
- Updated: 05:52 PM
नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के पूर्व अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को बृहस्पतिवार को राहत देते हुए उच्चतम न्यायालय ने जनवरी 2017 के उस आदेश में संशोधन कर दिया, जिसमें उन्हें बोर्ड के मामलों से प्रतिबंधित किया गया था। इसके साथ ही, न्यायालय ने बोर्ड के साथ उनके जुड़ाव के लिए रास्ता साफ कर दिया।
न्यायालय ने कहा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ठाकुर, नियमों और विनियमों के अनुरूप बीसीसीआई से संबंधित मामलों में भाग लेने के लिए स्वतंत्र हैं।
शीर्ष अदालत ने दो जनवरी, 2017 को बीसीसीआई के तत्कालीन अध्यक्ष ठाकुर को निर्देश दिया था कि वह तुरंत बोर्ड के कामकाज से खुद को अलग कर लें और उससे किसी भी तरह का संबंध न रखें।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने 2017 के आदेश में संशोधन संबंधी ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए आनुपातिकता के सिद्धांत को लागू करते हुए बृहस्पतिवार को संबंधित आदेश में संशोधन किया।
पीठ ने कहा, ''हम आनुपातिकता के सिद्धांत को लागू करने के लिए इसे एक उपयुक्त मामला पाते हैं, ताकि यह साबित हो सके कि अदालत का आशय न तो आजीवन प्रतिबंध लगाने का था और न ही इस मामले के तथ्यों एवं परिस्थितियों में इतना कठोर प्रतिबंध लगाना उचित या आवश्यक है।''
शीर्ष अदालत ने संज्ञान लिया कि ठाकुर नौ साल से अधिक समय से बीसीसीआई के कामकाज से अलग रहे हैं।
न्यायालय ने इस बात पर विचार किया कि ठाकुर ने तब उसके समक्ष बिना शर्त माफी मांगी थी।
ठाकुर की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी.एस. पटवालिया ने कहा कि ठाकुर को बीसीसीआई के कामकाज से जुड़े रहने से रोकने का आदेश आजीवन नहीं हो सकता।
उन्होंने कहा, ''सब कुछ मुझ पर (ठाकुर पर) आ पड़ा, क्योंकि मैं बीसीसीआई का अध्यक्ष था। मैं बस इतना कह रहा हूं कि यह अब हमेशा के लिए नहीं चल सकता।''
पटवालिया ने कहा कि यह आदेश नौ साल से अधिक समय से जारी है और अगर इसे रद्द नहीं किया गया तो इससे ठाकुर को कठिनाई और भेदभाव का सामना करना पड़ेगा।
उच्चतम न्यायालय ने दो जनवरी, 2017 को ठाकुर के खिलाफ अवमानना और झूठी गवाही की कार्यवाही शुरू की थी, क्योंकि उन्होंने बीसीसीआई की स्वायत्तता के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) के तत्कालीन अध्यक्ष शशांक मनोहर को पत्र लिखने के संबंध में एक झूठा हलफनामा दाखिल किया था।
शीर्ष अदालत ने 14 जुलाई, 2017 को ठाकुर को राहत देते हुए उनके खिलाफ अवमानना और झूठी गवाही की कार्यवाही को रद्द कर दिया। इससे पहले ठाकुर ने व्यक्तिगत रूप से न्यायालय से बिना शर्त माफी मांगी।
इससे पहले न्यायालय ने पूर्व प्रधान न्यायाधीश आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था, जिसका काम बीसीसीआई के लिए संविधान बनाने सहित सुधार के विभिन्न उपायों का सुझाव देना था।
न्यायालय ने बीसीसीआई की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली में सुधार के लिए समिति द्वारा की गई सिफारिशों को स्वीकार कर लिया था।
भाषा प्रशांत सुरेश
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