बांग्लादेश से लगी सीमा के बड़े हिस्से में अब तक बाड़ नहीं लगने पर रास में जताई गई चिंता
अविनाश
- 05 Feb 2026, 02:52 PM
- Updated: 02:52 PM
नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) बांग्लादेश से लगी चार हजार 96 किमी लंबी सीमा के बड़े हिस्से में अब तक बाड़ नहीं लग पाने पर चिंता जाहिर करते हुए भारतीय जनता पार्टी के एक सदस्य ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि राज्य स्तर पर प्रशासनिक इच्छाशक्ति के अभाव की पुनरावृत्ति रोकने के लिए केंद्र सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए।
शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए भाजपा के बाबूराम निषाद ने कहा कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने हाल ही में पश्चिम बंगाल सरकार को आदेश दिया है कि वह नौ सीमावर्ती जिले में चिह्नित भूमि 31 मार्च 2026 तक सीमा सुरक्षा बल को सौंप दे।
निषाद ने कहा कि यह अत्यंत चिंताजनक है कि यह भूमि हस्तांतरण 2016 से लंबित है जबकि केंद्र सरकार इसके लिए संपूर्ण भुगतान कर चुकी है।
उन्होंने कहा कि भारत-बांग्लादेश की चार हजार 96 किमी लंबी सीमा का बड़ा हिस्सा अब भी बिना बाड़ के है और वहां से घुसपैठ, तस्करी, पशु तस्करी, मादक पदार्थों की तस्करी, नकली नोटों की खेप लाने सहित राष्ट्रविरोधी गतिविधियां जारी हैं।
निषाद ने कहा कि राज्य स्तर पर प्रशासनिक इच्छाशक्ति के अभाव में यह हुआ और राज्य सरकार निर्णय नहीं ले पाई। इससे एक गंभीर रणनीतिक चुनौती उत्पन्न हो गई है। ''इसकी पुनरावृत्ति रोकने के लिए कठोर कदम उठाये जाने चाहिए।''
उन्होंने सुझाव दिया कि एक केंद्रीय सीमा गलियारे की स्थापना की जानी चाहिए और ऐसा कानूनी ढांचा बनाया जाना चाहिए जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे एक दो किमी के दायरे को गृह मंत्रालय के कानूनी नियंत्रण में लाया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि सीमा संबंधी कार्यों के लिए एक व्यापक एवं कठोर कानून बनाया जाना चाहिए।
भाजपा की ही माया नरोलिया ने आवारा पशुओं के कारण सड़क दुर्घटनाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 2024-25 में ऐसी 237 दुर्घटनाओं में 94 नागरिक मारे गए और 133 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
उन्होंने कहा कि ये दुर्घटनाएं राष्ट्रीय राजमार्गों, राज्य राजमार्गों और अन्य सड़कों पर हुईं। तेज गति वाले राष्ट्रीय राजमार्गों पर अचानक सामने आने वाले मवेशी एंबुलेन्स, आपात सेवाओं के वाहनों और आम वाहनों के लिए घातक साबित हो रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि मार्गों के संवेदनशील हिस्सों में पशुरोधी बाड़बंदी की जाए और राज्य सरकारों के साथ समन्वय कर आवारा पशुओं के संबंध में नीति बनाई जाए और आवारा पशुओं से होने वाली दुर्घटनाओं का अलग से आंकड़ा रखा जाए।
भाजपा के ही मयंक कुमार नायक ने कहा कि उच्च शिक्षा ग्रहण करने के बाद कई छात्र देश से बाहर चले जाते हैं या अच्छी कंपनियों में काम करने लगते हैं। ''लेकिन आज का समय कुछ और अपेक्षा रखता है। जब हम 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य रखते हैं तो आज जरूरत नौकरी पाने की नहीं, देने की है।''
उन्होंने मांग की कि ऐसे पाठ्यक्रम शुरू किए जाएं जिनमें सिखाया जाए कि उद्योग कैसे शुरु किया जाता है, सरकारी लाइसेंस कैसे लिए जाते हैं, पैसों की व्यवस्था कैसे होती है, निर्यात कैसे किया जाता है, निवेश कैसे किया जाता है, संबंधित नियम क्या हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ कैसे लिया जा सकता है? ''इससे आत्मनिर्भर भारत का हमारा सपना तेजी से साकार होगा।''
शून्यकाल में ही भाजपा के संजय सेठ और आम आदमी पार्टी के संदीप कुमार पाठक ने भी लोक महत्व से जुड़े अपने-अपने मुद्दे उठाए।
भाषा
मनीषा अविनाश
अविनाश
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