न्यायालय ने आय से अधिक संपत्ति मामले में शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को जमानत दी
नरेश
- 02 Feb 2026, 07:13 PM
- Updated: 07:13 PM
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में शिरोमणि अकाली दल के नेता और पंजाब के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया को सोमवार को जमानत दे दी।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय के चार दिसंबर के आदेश को चुनौती देने वाली मजीठिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। उच्च न्यायालय ने मजीठिया को इस मामले में जमानत देने से इनकार कर दिया था।
न्यायालय ने गौर किया कि मजीठिया को इससे पहले स्वापक औषधि एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत दर्ज एक अलग मामले में जमानत दी गई थी।
न्यायालय ने गौर किया कि मजीठिया इस मामले में पिछले सात महीनों से हिरासत में हैं।
पीठ ने राज्य की ओर से पेश वकील से पूछा, "आप उन्हें जेल में क्यों रखना चाहते हैं?"
राज्य की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ दवे ने तर्क दिया कि आरोप गंभीर हैं और अनुपातहीन संपत्ति लगभग 790 करोड़ रुपये है।
उन्होंने तर्क दिया कि जांच में शामिल अधिकारियों को धमकियां दी जा रही हैं।
मजीठिया की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एस. मुरलीधर ने एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामले का हवाला दिया।
उन्होंने कहा, "यह राजनीतिक प्रतिशोध है"। उन्होंने कहा कि आय से अधिक संपत्ति के मामले में जल्द ही सुनवाई समाप्त होने की कोई संभावना नहीं है क्योंकि इसमें 295 गवाह हैं।
मजीठिया को जमानत देते हुए पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष के लिए यह विकल्प खुला रहेगा कि वह निचली अदालत में उन पर कड़ी जमानत शर्तें लगाने के लिए दबाव डाले।
पिछले साल चार दिसंबर को दिए अपने आदेश में, उच्च न्यायालय ने मजीठिया की जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि जांच को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पंजाब सतर्कता ब्यूरो को तीन महीने के भीतर अपनी जांच पूरी करने का निर्देश देते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि इसके बाद मजीठिया जमानत पर रिहाई की मांग कर सकते हैं।
पंजाब सतर्कता ब्यूरो ने पिछले साल 25 जून को आय से अधिक संपत्ति के मामले में मजीठिया को गिरफ्तार किया था, जिसमें कथित तौर पर 540 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा करने का आरोप है।
मजीठिया के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी, पंजाब पुलिस की एक विशेष जांच टीम द्वारा 2021 के मादक पदार्थ के एक मामले की जारी जांच से संबंधित है।
उच्चतम न्यायालय में सुनवाई के दौरान, मजीठिया के वकील ने दलील दी कि याचिकाकर्ता को पहले एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज एक मामले में जमानत दी गई थी।
उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने पंजाब सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया था जिसमें उन्हें दी गई जमानत को चुनौती दी गई थी।
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नरेश
0202 1913 दिल्ली