नेहरू, वामपंथी इतिहासकारों ने गजनी को ‘महज लुटेरा’ बता इतिहास को विकृत किया : भाजपा
प्रशांत नरेश
- 05 Jan 2026, 05:03 PM
- Updated: 05:03 PM
नयी दिल्ली, पांच जनवरी (भाषा) भाजपा ने महमूद गजनी द्वारा सोमनाथ मंदिर के पहले विध्वंस की 1,000वीं बरसी पर सोमवार को कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि यह दिन ये “याद रखने और समझने” के लिए महत्वपूर्ण है कि कैसे जवाहरलाल नेहरू और वामपंथी इतिहासकारों ने मुस्लिम आक्रमणकारी को केवल एक लुटेरा बताकर इतिहास को विकृत किया और यह नहीं कहा कि वह एक “धार्मिक कट्टरपंथी” था।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि मंदिर के पुजारियों और तत्कालीन राजा ने महमूद गजनी से लाखों सोने के सिक्कों के बदले ‘शिवलिंग’ को छोड़ने की विनती की थी, लेकिन उसने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया और यह कहते हुए उसे तोड़ दिया कि वह “मूर्ति पूजकों” के साथ व्यापार करने वाले “घृणित व्यक्ति” के बजाय “मूर्तिभंजक” के रूप में जाना जाना चाहता है।
भाजपा के राज्यसभा सदस्य ने यहां पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “महमूद गजनी के साथ रहे एक इतिहासकार ने अपने लेखन में इस घटना का जिक्र किया है। इससे वामपंथी इतिहासकारों और अन्य लोगों द्वारा इतिहास को विकृत करने वाले सभी सिद्धांत ध्वस्त हो जाते हैं।”
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि उन्होंने महमूद गजनी को एक ऐसे व्यक्ति के रूप में पेश किया जो धार्मिक कट्टरपंथी नहीं था और वह भारत में केवल “लूटपाट” के उद्देश्य से आया था।
उन्होंने आरोप लगाया, “हमारे इतिहास में यह पढ़ाया जाता है कि महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर में जो कुछ भी किया वह केवल धन कमाने के लिए था और इसका उसकी धार्मिक भावनाओं से कोई लेना-देना नहीं था।”
त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू द्वारा लिखित पुस्तक ‘द डिस्कवरी ऑफ इंडिया’ महमूद गजनी के आक्रमण और सोमनाथ मंदिर पर हमले से संबंधित इतिहास में की गयी सभी विकृतियों का स्रोत है।
उन्होंने कहा, “नेहरू ने अपनी पुस्तक में कहा है कि महमूद गजनी एक धर्मनिष्ठ व्यक्ति से कहीं अधिक एक योद्धा था। अन्य कई विजेताओं की तरह, वह भी अपनी विजय के लिए धर्म के नाम का दुरुपयोग करता था। भारत उनके लिए महज एक ऐसी जगह थी जहां से वे धन संपदा अर्जित कर सकते थे।”
भाजपा नेता ने कहा, “नेहरू ने यह भी लिखा कि महमूद गजनी कला का इतना बड़ा प्रेमी था कि मथुरा से दिल्ली तक की इमारतों की सुंदरता और वास्तुकला को देखने के बाद उसने अभिभूत होते हुए कहा कि इन्हें मनुष्यों ने नहीं बल्कि ‘जिन्नों’ ने बनाया होगा।”
त्रिवेदी ने कहा, इसीलिए आज के दिन को याद करना महत्वपूर्ण है ताकि यह समझा जा सके कि भारत के “सम्मान और पहचान” के साथ किस प्रकार “घिनौना मजाक” किया गया था।
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