अतिक्रमण हटाओ अभियान में आवास गंवाने वालों को मकान देने के खिलाफ भाजपा का विरोध प्रदर्शन
सुमित दिलीप
- 05 Jan 2026, 03:27 PM
- Updated: 03:27 PM
बेंगलुरु, पांच जनवरी (भाषा) बेंगलुरु के कोगिलु में हाल ही में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान अपने आवास गंवाने वाले लोगों को मकान देने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार को यहां प्रदर्शन किया।
बगलूर मेन रोड पर कंट्री क्लब के पास यह विरोध प्रदर्शन "कोगिलु बचाओ, अवैध प्रवासियों को हटाओ" के नारे के तहत आयोजित किया गया। इसमें भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी वाई विजयेंद्र, विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक, विधान परिषद में विपक्ष के नेता चलावदी नारायणस्वामी और कई विधायक शामिल हुए।
भाजपा नेता आर अशोक ने पत्रकारों से कहा कि यह प्रदर्शन कर्नाटक की जमीन की रक्षा के लिए है, जो राज्य के लोगों की है और केवल उन्हें ही मिलनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने कोगिलु में प्रदर्शन स्थल से लगभग तीन किलोमीटर दूर ही भाजपा कार्यकर्ताओं को रोक दिया, जो अनुचित है।
कांग्रेस नेतृत्व और मुख्यमंत्री सिद्धरमैया की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, "वे राजनीतिक लाभ के लिए हमारी जमीन का इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर कांग्रेस के पास जमीन है, तो वे अपनी निजी जमीन क्यों नहीं देते? कांग्रेस नेताओं के पास कर्नाटक में हजारों एकड़ जमीन है, वे उसे क्यों नहीं देते? केवल हमारी जमीन ही क्यों?"
अशोक ने कहा कि कर्नाटक की जमीन किसी व्यक्तिगत नेता की नहीं, बल्कि राज्य के लोगों की है।
वहीं, कर्नाटक के शहरी विकास मंत्री बैरथी सुरेश ने बृहस्पतिवार को कहा था कि कोगिलु लेआउट की फकीर कॉलोनी से हटाए गए परिवारों में से केवल 90 परिवार ही मुआवजे के तौर पर मिलने वाले मकानों के पात्र हैं। उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया कि 400 परिवारों को घर दिए जाएंगे।
अधिकारियों के अनुसार, 20 दिसंबर को कोगिलु के वसीम लेआउट और फकीर कॉलोनी में एक कचरा प्रसंस्करण इकाई स्थापित करने के लिए अतिक्रमण हटाया गया था।
भाजपा नेता सी एन अश्वथ नारायण ने आरोप लगाया कि बड़ी संख्या में अवैध बांग्लादेशी प्रवासी कर्नाटक में बस गए हैं और असली लाभार्थियों की अनदेखी कर उन्हें सरकारी लाभ दिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि राज्य में 25 लाख से अधिक बांग्लादेशी रह रहे हैं और सरकार उन पर कार्रवाई करने में विफल रही है।
उन्होंने आरोप लगाया, "आठ-दस साल पहले आवेदन करने वाले असली हकदार अब भी घरों का इंतजार कर रहे हैं, जबकि अवैध प्रवासियों को फ्लैट दिए जा रहे हैं। यह केवल तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीति है।"
भाषा सुमित