सेना ने गोला-बारूद के 90 प्रतिशत स्वदेशीकरण से अपनी युद्ध क्षमता को मजबूत किया
देवेंद्र माधव
- 02 Jan 2026, 10:22 PM
- Updated: 10:22 PM
नयी दिल्ली, दो जनवरी (भाषा) सेना अपनी हथियार प्रणालियों में लगभग 200 प्रकार के गोला-बारूद और सटीक हथियारों का इस्तेमाल करती है और लक्षित नीतिगत सुधारों तथा उद्योग के साथ सहभागिता के माध्यम से इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक का स्वदेशीकरण किया जा चुका है और इन्हें घरेलू स्रोतों से प्राप्त किया जा रहा है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि गोला-बारूद, पुर्जे और रसद युद्ध क्षमता की रीढ़ हैं और इस बात को समझते हुए, भारतीय सेना ने गोला-बारूद उत्पादन में आत्मनिर्भरता को अपनी तैयारी रणनीति के केंद्र में रखा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि आयात पर निर्भरता कम करने से लेकर एक मजबूत घरेलू आपूर्ति श्रृंखला बनाने तक, स्वदेशीकरण के लिए सेना का निरंतर प्रयास ‘‘गोला-बारूद की तैयारी और दीर्घकालिक युद्ध क्षमता को नया आकार दे रहा है’’।
अधिकारी ने कहा कि पिछले चार से पांच वर्षों में, ‘‘प्रतिस्पर्धा और कई स्रोतों से सामान खरीदने के विकल्पों को बढ़ावा देने’’ के लिए खरीद प्रक्रियाओं का पुनर्गठन किया गया है।
अधिकारी ने बताया कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत लगभग 16,000 करोड़ रुपये का ऑर्डर तैयार किया गया है, जबकि पिछले तीन वर्षों में स्वदेशी निर्माताओं को लगभग 26,000 करोड़ रुपये के गोला-बारूद की आपूर्ति के ऑर्डर दिए गए हैं।
अधिकारियों ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य एक मजबूत और आत्मनिर्भर गोला-बारूद प्रणाली का निर्माण करना है।
उन्होंने बताया कि सेना अपनी हथियार प्रणालियों में लगभग 200 प्रकार के गोला-बारूद और सटीक गोला-बारूद का इस्तेमाल करती है और लक्षित नीतिगत सुधारों और उद्योग के साथ सहयोग के माध्यम से, इनमें से 90 प्रतिशत से अधिक का स्वदेशीकरण किया गया है, जिनकी खरीद घरेलू स्तर पर की जा रही है।
सेना ने कहा कि भारत का सुरक्षा माहौल तेजी से अनिश्चितता, तीव्र तकनीकी परिवर्तन और लंबे समय तक चलने वाले संकटों से प्रभावित हो रहा है।
इसने कहा कि इस संदर्भ में, सैन्य तत्परता न केवल उन्नत हथियारों पर निर्भर करती है, बल्कि लंबे समय तक अभियानों को जारी रखने की क्षमता पर भी निर्भर करती है।
अधिकारियों ने कहा कि उइस चुनौती का सामना करने के लिए भारतीय सेना ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया - मेक फॉर द वर्ल्ड’ की परिकल्पना के अनुरूप स्वदेशीकरण की प्रक्रिया को तेज कर दिया है।
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