बेल्जियम की शीर्ष अदालत ने प्रत्यर्पण के खिलाफ भगोड़े हीरा व्यापारी चोकसी की अपील खारिज की
संतोष
- 17 Dec 2025, 10:25 PM
- Updated: 10:25 PM
(अभिषेक शुक्ला)
नयी दिल्ली, 17 दिसंबर (भाषा) बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत ‘कोर्ट ऑफ कैसेशन’ ने भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध के खिलाफ भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी की अपील को खारिज कर दिया है।
बुधवार को जारी आदेश के अनुसार, शीर्ष न्यायालय ने निचली अदालत के इस दृष्टिकोण का समर्थन किया है कि भारत में न्याय से वंचित किए जाने, यातना दिए जाने या अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार किये जाने के चोकसी के दावे निराधार हैं।
चोकसी पर 104 यूरो का जुर्माना लगाते हुए, न्यायालय ने ‘एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील’ के अभियोग कक्ष के उस दृष्टिकोण को बरकरार रखा, जिसमें यह कहा गया था कि चोकसी द्वारा प्रदान किए गए दस्तावेज यह साबित करने के लिए अपर्याप्त हैं कि उसे न्याय से वंचित किए जाने या यातना दिये जाने या अमानवीय और अपमानजनक व्यवहार किये जाने का वास्तविक व गंभीर खतरा है।
‘पीटीआई-भाषा’ को प्राप्त आदेश से पता चलता है कि चोकसी ने अभियोग कक्ष के फैसले का विरोध करते हुए दलील दी थी कि एंटीगुआ से उसका कथित अपहरण करने की कोशिश हुई थी। उसने इस कथित घटना पर इंटरपोल की फाइल नियंत्रण आयोग (सीसीएफ) की राय, मीडिया में हुई कवरेज और बेगुनाह माने जाने के सिद्धांत के उल्लंघन का हवाला दिया। इन आधारों पर उसने भारत में निष्पक्ष सुनवाई न मिलने की आशंका जताई।
सीसीएफ ने चोकसी की अपील के आधार पर नवंबर 2022 में इंटरपोल रेड नोटिस सूची से उसका नाम हटा दिया था। सीसीएफ इंटरपोल का एक स्वतंत्र निकाय है जो इंटरपोल सचिवालय के "नियंत्रण में नहीं" है और इसमें मुख्य रूप से विभिन्न देशों के निर्वाचित वकील कार्यरत हैं, जहां लोग उन्हें भगोड़ा घोषित करने के निर्णयों को चुनौती दे सकते हैं।
चोकसी ने दलील दी थी अभियोजक ने एंटीगुआ से उसके कथित अपहरण की कोशिश से जुड़े मामले में इंटरपोल की सीसीएफ के निष्कर्षों की जानकारी एंटवर्प जिला अदालत की पूर्व सुनवाई कक्ष से छिपाई गई थी, लेकिन इस तर्क को भी बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत का समर्थन नहीं मिला।
पूर्व सुनवाई कक्ष ने मुंबई अदालत के वारंट को सही ठहराया था।
‘कोर्ट ऑफ कैसेशन’ ने अभियोग कक्ष के निष्कर्षों में कोई खामी नहीं पाई। अभियोजन कक्ष ने 29 नवंबर, 2024 के एक निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा था, जिसमें मुंबई की एक विशेष अदालत द्वारा मई 2018 और जून 2021 में जारी किए गए गिरफ्तारी वारंट को "लागू करने योग्य" करार दिया गया था, जिससे चोकसी के प्रत्यर्पण का मार्ग प्रशस्त हुआ था।
अदालत ने कहा कि अभियोग कक्ष के फैसले में अपील में उठाए गए आवेदक के बचाव के तर्कों का जवाब दिया गया है और उन्हें खारिज किया गया है। इसके लिए हर एक तर्क पर अलग-अलग जवाब देना जरूरी नहीं था और न ही इससे बचाव का कोई नया मामला बनता है।
अदालत ने यह भी सही ठहराया कि प्रत्यर्पण अधिनियम 1874 के अनुच्छेद 2ए, पैराग्राफ दो के तहत प्रत्यर्पण से इनकार करने का आधार (यानी यातना की आशंका) कानूनन इस मामले में लागू नहीं होती।
न्यायालय की अध्यक्षता फ़िलिप वान वोल्सेम, सेक्शन अध्यक्ष इरविन फ़्रांसिस और न्यायाधीश एरिक वान डोरेन, न्यायधीश ब्रूनो लिएर्टर्ट और न्यायाधीश जोस डेकोकर ने की।
चोकसी जनवरी 2018 के पहले सप्ताह में भारत से भाग गया था, जिसके कुछ दिन बाद पीएनबी में 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले का पता था।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने अपने आरोपपत्र में आरोप लगाया है कि 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले में से अकेले चोकसी ने 6,400 करोड़ रुपये की हेराफेरी की है।
भाषा नोमान