संसद ने अनुदान की अनुपूरक मांगों और विनियोग विधेयक को मंजूरी दी
अविनाश सुरेश
- 16 Dec 2025, 10:10 PM
- Updated: 10:10 PM
नयी दिल्ली, 16 दिसंबर (भाषा) संसद ने मंगलवार को चालू वित्त वर्ष के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगों और संबंधित विनियोग विधेयक को मंजूरी दे दी।
राज्यसभा ने विनियोग विधेयक को चर्चा के बाद लोकसभा को लौटा दिया। लोकसभा इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है।
सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 41,455 करोड़ रुपये के शुद्ध अतिरिक्त व्यय के लिए मंजूरी मांगी थी, जिसमें 27,000 करोड़ रुपये से अधिक उर्वरक और पेट्रोलियम सब्सिडी से जुड़ा व्यय भी शामिल है।
सरकार ने कुल 1.32 लाख करोड़ रुपये के सकल अतिरिक्त खर्च के लिए संसद से स्वीकृति मांगी थी। इनमें से 41,455.39 करोड़ रुपये शुद्ध नकद व्यय होंगे, जबकि शेष राशि को विभिन्न मंत्रालयों/विभागों की 90,812 करोड़ रुपये की बचत से समायोजित किया जाएगा।
अनुदान की अनुपूरक मांगों के अनुसार उर्वरक सब्सिडी और संबंधित मदों पर खर्च के लिए 18,525 करोड़ रुपये की मंज़ूरी मांगी गई और पेट्रोलियम मंत्रालय के लिए एलपीजी सब्सिडी के लिहाज से करीब 9,500 करोड़ रुपये की स्वीकृति मांगी गई थी।
उच्च शिक्षा विभाग द्वारा अतिरिक्त व्यय के लिए 1,304 करोड़ रुपये और वाणिज्य मंत्रालय द्वारा 225 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं।
लोकसभा ने 2025-26 के लिए अनुदानों की अनुपूरक मांगें-प्रथम बैच और संबंधित विनियोग (संख्याक 4) विधेयक, 2025 को सोमवार को स्वीकृति प्रदान की थी।
राज्यसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने अनुदान की अनुपूरक मागों पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि देश में यूरिया की तनिक भी कमी नहीं है और 2025 में इसका उत्पाद लगातार बढ़ा है। उन्होंने कहा कि 2014-15 से 2024-2025 के बीच देश का स्वास्थ्य बजट दोगुने से भी अधिक बढ़ा है।
उन्होंने कहा कि इस दौरान लगभग सभी फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) दोगुना हो गया है, जबकि रागी का एमएसपी तीन गुना बढ़ा है।
चौधरी ने कहा कि सरकार राजकोषीय सृदृढ़ीकरण के लिए अत्यधिक सजग है और इस क्षेत्र में सरकार की विश्व भर में सराहना हुई है तथा भारत की ‘क्रेडिट रेटिंग’ काफी बेहतर हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार जहां राजकोषीय घाटे को कम कर रही है वहीं जनता के कल्याण से जुड़ी किसी भी योजना और आधारभूत ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं के लिए कोष में कोई कमी नहीं होने दी गयी है।
विभिन्न विपक्षी सदस्यों के आरोपों को खारिज करते हुए वित्त राज्य मंत्री ने कहा कि भारत सरकार किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं करती। उन्होंने अपनी बात की पुष्टि के लिए विभिन्न राज्यों को पिछले 10-11 साल में केंद्र द्वारा जारी राशि का विवरण पेश किया। इस क्रम में उन्होंने तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक आदि राज्यों को दी गयी राशि का जिक्र किया।
चौधरी ने कहा कि मोदी सरकार किसी के साथ भेदभाव नहीं करती, बल्कि वह संघवाद की भावना और संघीय ढांचे को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।
उन्होंने विपक्ष के इस आरोप को भी खारिज कर दिया कि मोदी सरकार ने शिक्षा क्षेत्र को पर्याप्त तरजीह नहीं दी है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का परिणाम सामने दिखता है। उन्होंने कहा कि इस सरकार के कार्यकाल में आईआईटी संस्थानों की संख्या 16 से बढ़कर 23 हो गई है, वहीं आईआईएम 13 से बढ़कर 21 हो गए तथा केंद्रीय विश्वविद्यालयों की संख्या 40 से बढ़कर 48 हुई है। एम्स की संख्या भी सात से बढ़कर 12 हो गयी है।
भाषा अविनाश माधव
अविनाश