मुकदमे की सुनवाई शुरू होने तक नवलखा को दिल्ली में रहने की इजाजत देने में हर्ज नहींः उच्च न्यायालय
पारुल पवनेश
- 16 Dec 2025, 06:18 PM
- Updated: 06:18 PM
मुंबई, 16 दिसंबर (भाषा) बंबई उच्च न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि वह एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले के आरोपी, मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा को मुकदमे की सुनवाई शुरू होने तक दिल्ली स्थित उनके आवास में रहने की इजाजत देने के पक्ष में है।
न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की पीठ ने कहा कि नवलखा के 'देश से फरार होने का खतरा' नहीं है, क्योंकि ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है, जब उन्होंने भागने की कोशिश की हो।
पीठ ने कहा कि नवलखा को लगता है कि उन्हें मुंबई में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है और वह अपने परिवार व सामाजिक दायरे से पूरी तरह से कट गए हैं।
बंबई उच्च न्यायालय ने नवलखा को एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले में 2023 में जमानत दे दी थी। हालांकि, उसने मानवाधिकार कार्यकर्ता पर निचली अदालत की पूर्व अनुमति के बिना मुंबई नहीं छोड़ने की शर्त लागू की थी।
नवलखा ने इस साल राष्ट्रीय अभिकरण एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत में अर्जी दायर कर उन्हें इस आधार पर दिल्ली में रहने की अनुमति देने का आग्रह किया कि यह उनका गृहनगर है।
हालांकि, अदालत ने नवलखा की अर्जी खारिज कर दी, जिसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया।
नवलखा के वकील युग चौधरी ने मंगलवार को उच्च न्यायालय के समक्ष दलील दी कि उनके मुवक्किल 73 साल के हैं और जमानत मिलने के बाद से मुंबई में किराये के मकान में रह रहे हैं।
चौधरी ने कहा, “नवलखा मूल रूप से दिल्ली के निवासी हैं। उनका वहां एक मकान है। वह मुंबई में रहने का खर्च नहीं उठा सकते। मामले में सुनवाई शुरू ही नहीं हो रही है। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो वह दिवालिया हो जाएंगे।”
उन्होंने कहा कि नवलाखा दिल्ली स्थित एनआईए कार्यालय से वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस मामले की सुनवाई में शामिल होंगे।
चौधरी ने कहा कि जब भी निचली अदालत निर्देश देगी या अभियोजक अनुरोध करेगा, नवलखा भौतिक रूप से निचली अदालत के समक्ष पेश होंगे।
उच्च न्यायालय ने कहा कि हालांकि, वह नवलखा को दिल्ली से कार्यवाही में शामिल होने की अनुमति नहीं देगा, लेकिन वह सुनवाई शुरू होने तक उन्हें दिल्ली में रहने की अनुमति देने के पक्ष में है।
पीठ ने कहा, “हम याचिका में दी गई दलीलों से संतुष्ट हैं और ऐसा कुछ भी नहीं है, जिससे यह संकेत मिले कि वह भागने की कोशिश कर सकते हैं। हमने अपना फैसला कर लिया है।”
उच्च न्यायालय ने कहा कि अभियोजन एजेंसी (एनआईए) यह निर्दिष्ट कर सकती है कि नवलखा पर क्या शर्तें लगाई जानी चाहिए। उसने मामले की अगली सुनवाई बुधवार को तय की।
यह मामला 31 दिसंबर 2017 को पुणे के शनिवारवाड़ा में कबीर कला मंच की ओर से आयोजित एल्गार परिषद के कार्यक्रम के दौरान लोगों को उकसाने और भड़काऊ भाषण देने से संबंधित है, जिसके चलते महाराष्ट्र में बड़े पैमाने पर हिंसा और जान-माल का नुकसान हुआ।
भाषा पारुल