जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने को लेकर केंद्र से परामर्श करे तमिलनाडु : न्यायालय
धीरज नेत्रपाल
- 15 Dec 2025, 09:39 PM
- Updated: 09:39 PM
नयी दिल्ली, 15 दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को तमिलनाडु सरकार को राज्य में जवाहर नवोदय विद्यालयों (जेएनवी) की स्थापना के मुद्दे पर केंद्र के साथ विचार विमर्श करने का निर्देश दिया। शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि ‘‘हम एक संघीय समाज हैं’’।
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने कहा कि राज्य सरकार को टकराव का रवैया नहीं अपनाना चाहिए और एक संघीय प्रारूप में चर्चा होनी चाहिए।
न्यायालय ने अधिकारियों को तमिलनाडु के प्रत्येक जिले में जेएनवी स्थापित करने के लिए आवश्यक भूमि की आवश्यकता का आकलन करने का निर्देश दिया।
पीठ ने कहा, ‘‘आप एक कदम बढ़ाएंगे, वे भी एक कदम बढ़ाएंगे। हो सकता है वे दो कदम बढ़ा दें।’’
न्यायालय ने कहा, ‘‘आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद तमिलनाडु को सब प्रसिद्धि मिली है। यह दक्षिण भारत का सबसे बड़ा औद्योगिक राज्य है।’’
पीठ ने कहा कि तमिलनाडु सरकार से इसे थोपा हुआ फैसला न समझे बल्कि यह राज्य के छात्रों के लिए एक अवसर है।
न्यायालय ने कहा, ‘‘आप कह सकते हैं कि यह हमारी भाषा नीति है। वे इस पर विचार करेंगे।’’
पीठ ने कहा, ‘‘अपने इस कार्य और इसे अंजाम देने के तरीके के बारे में केंद्र सरकार के सचिवों को सूचित करें। कृपया सकारात्मक दृष्टिकोण रखें।’’
न्यायालय ने कहा कि उसने तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालयों में प्रवेश पाने के हकदार छात्रों के हित में ये निर्देश पारित किए हैं।
सुनवाई के दौरान, तमिलनाडु की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता पी. विल्सन ने कहा कि जवाहर नवोदय विद्यालय तीन-भाषा फॉर्मूले का पालन करते हैं, जबकि राज्य सरकार की वैधानिक दो-भाषा नीति है।
उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार को प्रत्येक जिले में लगभग 30 एकड़ जमीन उपलब्ध करानी होगी और इससे संबंधित लागत वहन करनी होगी।
न्यायमूर्ति नागरत्ना ने टिप्पणी की कि इस मुद्दे को भाषा विवाद में नहीं बदलना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘इसे भाषा का मुद्दा न बनाएं। हम एक संघीय समाज हैं। आप गणतंत्र का हिस्सा हैं। अगर आप एक कदम आगे बढ़ते हैं, तो वे भी एक कदम आगे बढ़ेंगे।’’
शीर्ष अदालत मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी।
उच्च न्यायालय ने हिंदी नहीं थोपे जाने के केंद्र और जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिखित अभिवदेनों का संज्ञान लेने के बाद राज्य को विद्यालयों की स्थापना की अनुमति देने का निर्देश दिया था।
भाषा धीरज