भाजपा ने मनरेगा का नाम बदले जाने की आलोचना को लेकर का कांग्रेस पर पलटवार किया
अमित नेत्रपाल
- 13 Dec 2025, 08:51 PM
- Updated: 08:51 PM
नयी दिल्ली, 13 दिसंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शनिवार को कहा कि ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना का नाम बदलने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का निर्णय इसका नाम बदलने के लिए नहीं, बल्कि इसकी ‘‘भावना’’ को बदलने के लिए है।
पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने पर कांग्रेस की आलोचना का जवाब देते हुए कहा कि विपक्षी दल और उसके नेता इस फैसले को समझ नहीं सकते क्योंकि वे विशेषाधिकार की भावना से काम करते हैं।
भाजपा नेता त्रिवेदी ने परोक्ष तौर पर महात्मा गांधी के नाम की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘जिस नाम पर कांग्रेस अपना विशेष अधिकार मानती है, वह पूरे देश का है।’’
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का नाम बदलकर ‘पूज्य बापू ग्रामीण रोजगार योजना’ करने वाले एक विधेयक को शुक्रवार को मंजूरी दे दी।
कांग्रेस के संचार प्रभारी महासचिव जयराम रमेश ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मोदी सरकार योजनाओं का नाम बदलने में ‘‘मास्टर’’ है और सवाल किया कि इस योजना के नाम में "महात्मा गांधी" होने में क्या गलत है।
कांग्रेस महासचिव एवं संगठन प्रभारी के सी वेणुगोपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री ने कभी मनरेगा को ‘‘विफलता का स्मारक’’ कहा था, लेकिन अब इस ‘‘क्रांतिकारी’’ योजना का श्रेय लेने के लिए इसका नाम बदल रहे हैं।
भाजपा नेता त्रिवेदी ने पलटवार करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री (इस योजना) का नाम नहीं बदल रहे हैं, बल्कि इसकी भावना को बदल रहे हैं।’’
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपना पूरा जीवन राष्ट्र और जनता की सेवा में समर्पित कर दिया है और वे इसी भावना के साथ काम करते हैं।
त्रिवेदी ने मनरेगा का नाम बदलने की कांग्रेस द्वारा आलोचना किए जाने के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘लेकिन कांग्रेस, जिसने ‘आगे-पीछे हमारी सरकार, हम हैं यहां के राजकुमार’ के सिद्धांत पर काम किया है, वह उस भावना को नहीं समझ सकती जिसके साथ प्रधानमंत्री काम करते हैं।’’
कांग्रेस के इस आरोप पर कि सरकार इस योजना का श्रेय ले रही है, त्रिवेदी ने कहा कि कांग्रेस ने न तो कोई उपयोगी काम किया है और न ही कोई ऐसा काम जिसका श्रेय लिया जा सके।
त्रिवेदी ने कहा, ‘‘आपने सत्ता की भावना के चलते किंग्सवे का नाम बदलकर राजपथ रखा। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इसका नाम कर्तव्यपथ रखे जाने के बाद कर्तव्य की भावना जागृत हुई।’’
उन्होंने कहा, ‘‘सात रेस कोर्स रोड नाम से शाही घुड़सवारी का आभास होता था। जब इसका नाम बदलकर लोक कल्याण मार्ग किया गया, तो इससे जन कल्याण की भावना उत्पन्न हुई। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का नाम बदलकर सेवा तीर्थ रखने से सेवा का भाव उत्पन्न हुआ।’’
भाषा अमित