मप्र: शीर्ष खेल अलंकरण को लेकर दो एवरेस्ट विजेताओं की कानूनी जंग जारी, नयी याचिका दायर
हर्ष शोभना
- 11 Dec 2025, 09:28 PM
- Updated: 09:28 PM
इंदौर, 11 दिसंबर (भाषा) दुनिया का सबसे ऊंचा पर्वत माउंट एवरेस्ट फतह करने वाले पर्वतारोही मधुसूदन पाटीदार ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में नयी याचिका दायर करके राज्य सरकार के शीर्ष खेल अलंकरण ‘विक्रम पुरस्कार’ के लिए अन्य एवरेस्ट विजेता भावना डेहरिया के चयन को चुनौती दी है।
पाटीदार ने 2017 के दौरान महज 20 साल की उम्र में माउंट एवरेस्ट फतह किया था, जबकि डेहरिया ने 2019 के दौरान इस सर्वोच्च पर्वत शिखर पर जीत हासिल की थी।
पाटीदार की रिट याचिका उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने आठ दिसंबर को यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि डेहरिया को साहसिक खेलों की श्रेणी में 2023 का विक्रम पुरस्कार प्रदान किए जाने के निर्णय में राज्य सरकार ने कोई चूक नहीं की है।
पाटीदार ने इस फैसले को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय की खंडपीठ में रिट अपील दायर की है।
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति बिनोद कुमार द्विवेदी ने रिट अपील पर बृहस्पतिवार को संक्षिप्त सुनवाई के बाद अगली सुनवाई के लिए 15 दिसंबर की तारीख तय की।
पाटीदार ने अपनी नयी याचिका में अंतरिम राहत के तौर पर अदालत से गुहार की है कि प्रदेश सरकार द्वारा डेहरिया को विक्रम पुरस्कार प्रदान करने पर रोक लगाई जाई।
पाटीदार की दलील है कि पर्वतारोहण के क्षेत्र में वरिष्ठता के आधार पर साहसिक खेलों की श्रेणी में 2023 का विक्रम पुरस्कार नियमानुसार उन्हें दिया जाना चाहिए।
रिट अपील में कहा गया है कि इस पुरस्कार के लिए डेहरिया के चयन की प्रक्रिया ‘त्रुटिपूर्ण’ है और इस सिलसिले में पाटीदार की वरिष्ठता और उपलब्धियों को ‘मनमाने और भेदभावपूर्ण तरीके’ से नजरअंदाज किया गया है।
मध्यप्रदेश पुरस्कार नियम 2021 के मुताबिक साहसिक खेलों की श्रेणी में वे खिलाड़ी पुरस्कार के आवेदन के लिए पात्र होते हैं जिन्होंने पिछले पांच सालों में साहसिक खेल गतिविधियों में निरंतर भाग लेते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ विशेष उपलब्धियां अर्जित की हों।
इस आधार पर पाटीदार की रिट याचिका निरस्त करते हुए उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने आठ दिसंबर को कहा था कि आठ साल पहले एवरेस्ट फतह करने वाले पाटीदार 2023 के विक्रम पुरस्कार के लिए पात्र ही नहीं थे, इसलिए प्रदेश सरकार द्वारा उनका दावा खारिज किए जाने का फैसला सही है।
इस आदेश के खिलाफ दायर रिट अपील में पाटीदार का एक तर्क यह भी है कि प्रदेश सरकार ने साहसिक खेलों की श्रेणी में 2022 के विक्रम पुरस्कार के वास्ते न तो कोई अधिसूचना जारी की और न ही किसी को यह अलंकरण प्रदान किया, इसलिए 2023 के विक्रम पुरस्कार पर उनका हक बनता है।
‘विक्रम पुरस्कार’, राज्य का सबसे बड़ा खेल अलंकरण है जिसे 1972 से प्रदान किया जा रहा है। अलग-अलग खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 12 वरिष्ठ खिलाड़ियों को ‘विक्रम पुरस्कार’ से नवाजा जाता है।
‘विक्रम पुरस्कार’ से सम्मानित किए जाने वाले हर खिलाड़ी को दो लाख रुपये और स्मृति चिह्न प्रदान किया जाता है। ‘विक्रम पुरस्कार’ से सम्मानित खिलाड़ियों को उत्कृष्ट खिलाड़ी घोषित करके शासकीय सेवा में नियुक्ति भी दी जाती है।
भाषा हर्ष