ईडी ने इस्लामिक स्टेट से जुड़े कट्टरपंथ मामले में चार राज्यों में छापे मारे
रवि कांत रवि कांत नरेश
- 11 Dec 2025, 05:00 PM
- Updated: 05:00 PM
मुंबई, 11 दिसंबर (भाषा) प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने प्रतिबंधित वैश्विक आतंकवादी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएसआईएस) के एक ‘घोर कट्टरपंथी’ मॉड्यूल के खिलाफ आतंकवाद वित्तपोषण से जुड़े धन शोधन मामले की जांच के तहत कई राज्यों में छापे मारे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि सुबह से शुरू हुई छापेमारी में महाराष्ट्र में ठाणे जिले के पडघा-बोरीवली क्षेत्र के गांवों, रत्नागिरी जिले, दिल्ली, कोलकाता और उत्तर प्रदेश के कुछ शहरों में लगभग 40 स्थानों पर तलाशी ली गई। आतंकी समूह आईएसआईएस का यह अड्डा ठाणे के पाडघा गांव में था।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में तलाशी के दौरान ईडी की टीमों को राज्य के आतंकवाद रोधी दस्ते (एटीएस) द्वारा सुरक्षा दी गई जबकि अन्य राज्यों में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने सुरक्षा प्रदान की।
केंद्रीय एजेंसी ने धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज किया है। उसने यह कार्रवाई राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) के नवंबर 2023 के उस आरोप-पत्र के आधार पर की है जिसमें आरोप था कि कुछ व्यक्ति एक ‘घोर कट्टरपंथी’ इस्लामिक स्टेट से जुड़े मॉड्यूल का हिस्सा थे तथा इस संगठन के लिए भर्ती, प्रशिक्षण, हथियार और विस्फोटक जुटाने और अपनी गतिविधियों को जारी रखने के लिए धन एकत्र करने में लगे थे।
एनआईए ने इस मामले में कमजोर युवाओं को आईएसआईएस की विचारधारा में शामिल करने और उन्हें कट्टरपंथी बनाने की साजिश रचने तथा आईईडी बनाने के आरोप में 21 लोगों को आरोप-पत्र में सूचीबद्ध किया है।
एनआईए के अनुसार, आरोपियों ने ग्रामीण ठाणे के पडघा गांव को 'अल शाम' नाम से एक 'मुक्त क्षेत्र' घोषित किया था। वे आसानी से प्रभावित होने वाले मुस्लिम युवाओं को अपने निवास स्थान से पडघा में स्थानांतरित होने के लिए प्रेरित कर रहे थे ताकि वे अपने गुट को मजबूत कर सकें।
एनआईए द्वारा आरोपियों पर आतंकवादी हमलों को अंजाम देने की 'तैयारी' करने, भारत में हिंसा फैलाने और इसकी धर्मनिरपेक्ष संस्कृति और लोकतांत्रिक व्यवस्था को नष्ट करने के लिए आईएसआईएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए धन जुटाने का भी आरोप लगाया गया था।
अधिकारियों के अनुसार ईडी ने मुंबई एटीएस की उन खुफिया जानकारियों को भी ध्यान में रखा जिनमें कहा गया था कि खैर (कैथ) लकड़ी के एक अवैध तस्करी गिरोह द्वारा ‘अपराध से अर्जित आय’ (पीएमएलए के तहत परिभाषित अवैध धन) का इस्तेमाल चरमपंथी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था।
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