हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेनों और मौजूदा ट्रेनों की लागत के बीच तुलना उपयुक्त नहीं: वैष्णव
सुभाष अविनाश
- 10 Dec 2025, 10:07 PM
- Updated: 10:07 PM
नयी दिल्ली, 10 दिसंबर (भाषा) रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन और इसके बुनियादी ढांचे को प्रायोगिक आधार पर विकसित किया गया है, इसलिए मौजूदा ट्रेन प्रणालियों के साथ अभी इसकी लागत की तुलना करना उपयुक्त नहीं होगा।
हाइड्रोजन से चलने वाली हरित ट्रेनों के शुरूआत की समयसीमा के विवरण और अन्य ऊर्जा स्रोतों पर चलने वाली ट्रेनों की तुलना में उनकी लागत के बारे में पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे ने अपनी पहली हाइड्रोजन ट्रेन को प्रायोगिक आधार पर परिचालित करने के लिए एक अत्याधुनिक परियोजना शुरू की है।
उन्होंने कहा कि नियोजित परिचालन, अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) द्वारा रेलवे में हाइड्रोजन-संचालित ट्रेन प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रदर्शित करने के लिए तैयार विनिर्देशों के अनुसार है।
वैष्णव ने कहा, ‘‘हाइड्रोजन ट्रेन-सेट का निर्माण पूरा हो चुका है। इस ट्रेन-सेट में उपयोग के लिए हाइड्रोजन उपलब्ध कराने के वास्ते जींद में एक हाइड्रोजन संयंत्र स्थापित किया गया है। इस संयंत्र में विद्युत अपघटन प्रक्रिया का उपयोग कर हाइड्रोजन का उत्पादन किया जा रहा है, जो हरित हाइड्रोजन उत्पादन का एक प्रमुख तत्व है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस परियोजना में प्रारंभिक चरण से डिजाइन तैयार करना और भारतीय रेलवे में पहली बार हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी का विकास करना शामिल है। चूंकि हाइड्रोजन ट्रेन-सेट और इसके बुनियादी ढांचे को प्रायोगिक आधार पर विकसित किया गया है, इसलिए इस समय हाइड्रोजन-ईंधन वाली ट्रेनों की लागत की तुलना मौजूदा ट्रेन प्रणालियों से करना उपयुक्त नहीं होगा।’’
वैष्णव ने कहा, ‘‘वर्तमान में, यह बड़ी लाइन वाले प्लेटफॉर्म पर दुनिया का सबसे लंबा (10 डिब्बे) और सबसे शक्तिशाली (2,400 किलोवाट) हाइड्रोजन ट्रेन-सेट है। इस ट्रेन-सेट में 1200 किलोवाट की दो ड्राइविंग पावर कार (डीपीसी) हैं, जिनकी कुल क्षमता 2400 किलोवाट है, साथ ही आठ यात्री कारें भी हैं।’’
रेल मंत्री ने एक अन्य सवाल के लिखित जवाब में बताया कि वंदे भारत ट्रेन के स्लीपर प्रारूप को लंबी और मध्यम दूरी की रात्रिकालीन यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है और वर्तमान में ऐसे दो ट्रेन सेट परीक्षण के तहत हैं।
वैष्णव ने कहा, ‘‘लंबी और मध्यम दूरी की रात्रिकालीन यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए वंदे भारत ट्रेन के स्लीपर संस्करण को स्वदेशी रूप से डिजाइन किया गया है। ऐसे दो रैक निर्मित किए जा चुके हैं और परीक्षण/चालू करने की प्रक्रिया में हैं।”
मंत्री ने व्यापक तकनीकी प्रगति और सुरक्षा सुविधाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि इन ट्रेनों में कवच प्रणाली के साथ ही उच्च अग्नि सुरक्षा मानक भी हैं।
रेल मंत्री के अनुसार, सभी डिब्बों में सीसीटीवी कैमरे लगे हैं वहीं आपातस्थिति में यात्री और ट्रेन प्रबंधक/लोको पायलट के बीच संचार के लिए आपातकालीन व्यवस्था भी है।
भाषा सुभाष