दार्जिलिंग चाय पर अस्तित्व का संकट, तत्काल नीतिगत हस्तक्षेप की जरूरत : रास में बोले श्रृंगला
मनीषा माधव वैभव
- 10 Dec 2025, 03:08 PM
- Updated: 03:08 PM
नयी दिल्ली, 10 दिसम्बर (भाषा) राज्यसभा सदस्य हर्षवर्धन श्रृंगला ने बुधवार को उच्च सदन में दार्जिलिंग चाय उद्योग की वर्तमान स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा कि उद्योग कम गुणवत्ता वाले आयात में बढ़ोतरी, जलवायु संबंधी दबाव और बागान की वित्तीय समस्या जैसी कई चुनौतियों का सामना कर रहा है।
शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए पूर्व विदेश सचिव श्रृंगला ने कहा कि भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त दार्जिलिंग चाय विश्व स्तर पर भारतीय गुणवत्तापूर्ण ब्रांड के रूप में मान्यता प्राप्त है। ‘‘यह सिर्फ एक उत्पाद नहीं बल्कि हमारी संस्कृति, हमारी सुबहों और हमारी यादों का हिस्सा है।’’
उन्होंने बताया कि चाय क्षेत्र पर 10 लाख से अधिक श्रमिकों–किसानों तथा 60 लाख से ज्यादा परिवारों की आजीविका निर्भर है।
श्रृंगला ने कहा कि 2025 की पहली छमाही में अफ्रीकी देशों और नेपाल से चाय के आयात में लगभग 45 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे भारतीय चाय, विशेषकर दार्जिलिंग की गुणवत्ता और मूल्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘कम गुणवत्ता वाली विदेशी चाय घरेलू और विदेशी बाजारों में दार्जिलिंग के नाम से बेची जा रही है, जिससे वास्तविक भारतीय दार्जिलिंग चाय की प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान हो रहा है।’’
उन्होंने दावा किया कि उद्योग की परेशानियों में इजाफा करते हुए दार्जिलिंग चाय का उत्पादन 1970 के दशक के 1.41 करोड़ किलोग्राम से घटकर 2024 में सिर्फ 51 लाख किलोग्राम रह गया है। श्रृंगला ने इसका कारण पारिस्थितिकी दबाव बताया, जिसमें तेजी से घटता वन क्षेत्र और सूखती मिट्टी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इसके चलते किसानों को कृत्रिम सिंचाई पर निर्भर होना पड़ रहा है।
उन्होंने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों की ओर भी इशारा किया और कहा कि कई बागान वित्तीय रूप से अक्षम हो चुके हैं, श्रमिक अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहे हैं और भूमि पट्टों तथा स्वामित्व अधिकारों से जुड़े मुद्दे वर्षों से लंबित हैं।
दार्जिलिंग चाय को ‘‘भारत का गौरव’’ बताते हुए श्रृंगला ने याद दिलाया कि सितंबर 2023 में नयी दिल्ली में हुए जी20 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार प्रमुखों को परोसा था।
उन्होंने कहा, ‘‘इस विरासत को संरक्षित करना हमारे राष्ट्रीय हित में है।’’
भारतीय चाय बोर्ड के ‘‘उल्लेखनीय कार्य’’ की सराहना करते हुए श्रृंगला ने कहा कि मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए उसके कार्यक्षेत्र और उद्देश्यों को पुनर्परिभाषित करने की जरूरत हो सकती है।
उन्होंने दार्जिलिंग चाय के अधिक आक्रामक प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया।
भाषा मनीषा माधव