छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, छह विश्वविद्यालयों के मध्य ‘रक्षक पाठ्यक्रम’ के लिए एमओयू
संजीव सुरभि
- 10 Dec 2025, 02:57 PM
- Updated: 02:57 PM
रायपुर, 10 दिसंबर (भाषा) छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य के छह विश्वविद्यालयों के मध्य ‘रक्षक पाठ्यक्रम’ के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किया गया है। बाल अधिकार और संरक्षण पर आधारित यह पाठ्यक्रम देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक नवाचार है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की उपस्थिति में राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग और राज्य के छह विश्वविद्यालयों के मध्य ‘रक्षक पाठ्यक्रम’ के लिए एमओयू संपन्न हुआ। बाल अधिकार एवं संरक्षण पर आधारित यह अनूठा पाठ्यक्रम देश में अपनी तरह का पहला शैक्षणिक नवाचार है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने कहा, ‘‘रक्षक पाठ्यक्रम छात्रों के सुरक्षित और जिम्मेदार भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह पाठ्यक्रम युवाओं को न केवल रोजगार के अवसर प्रदान करेगा, बल्कि बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता भी विकसित करेगा।’’
उन्होंने कहा कि कई बार बच्चे भूलवश या भ्रमित होकर गलत दिशा में चले जाते हैं क्योंकि वे अबोध होते हैं। ऐसे बच्चों को सही मार्ग पर लाना हम सभी का सामूहिक दायित्व है।
अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री साय ने रक्षक पाठ्यक्रम को रिकॉर्ड समय में तैयार करने और विश्वविद्यालयों में इसे लागू करने के लिए आयोग की अध्यक्ष डॉक्टर वर्णिका शर्मा और उनकी पूरी टीम को बधाई दी।
उन्होंने बताया कि यह एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम ‘पीजी डिप्लोमा इन चाइल्ड राइट्स एंड प्रोटेक्शन’ पाठ्यक्रम पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर, आंजनेय विश्वविद्यालय, रायपुर, एमिटी विश्वविद्यालय, रायपुर और श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भिलाई-दुर्ग में शुरू होगा।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य के किसी भी विश्वविद्यालय में अब तक ऐसा पाठ्यक्रम उपलब्ध नहीं था, जो युवाओं को बाल अधिकार संरक्षण के क्षेत्र में प्रशिक्षित करते हुए रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए। इस आवश्यकता को देखते हुए आयोग द्वारा ‘रक्षक – बाल अधिकार संरक्षण पर एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम’ को विकसित किया गया है। इस पाठ्यक्रम से युवाओं को सैद्धांतिक एवं विधिक ज्ञान, विभागीय योजनाओं, संस्थाओं और प्रायोगिक प्रक्रियाओं की गहरी समझ, बाल संरक्षण इकाइयों आदि के संबंध में जानकारी उपलब्ध होगी।
उन्होंने बताया कि संवेदनशीलता, जागरूकता और बाल-अधिकारों की आत्मिक समझ विकसित करने वाला यह पाठ्यक्रम युवाओं को इस क्षेत्र में कुशल, समर्पित और प्रभावी मानव संसाधन के रूप में तैयार करेगा। आयोग द्वारा पाठ्यक्रम के संचालन, प्रशिक्षण, परामर्श और मार्गदर्शन की संपूर्ण सुविधा विश्वविद्यालयों को निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएगी।
अधिकारियों ने बताया कि कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉक्टर वर्णिका शर्मा, विश्वविद्यालयों के कुलपति और कुलसचिव तथा अन्य अधिकारी मौजूद थे।
भाषा संजीव