छत्तीसगढ़: आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के विरुद्ध दर्ज मामलों के निराकरण की प्रक्रिया का अनुमोदन
संजीव सुरभि
- 10 Dec 2025, 02:51 PM
- Updated: 02:51 PM
रायपुर, 10 दिसंबर (भाषा) छत्तीसगढ़ में मंत्रिपरिषद ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के विरूद्ध दर्ज आपराधिक मामलों के निराकरण/वापसी संबंधी प्रक्रिया को अनुमोदित कर दिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आज यहां सिविल लाईन स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
उन्होंने बताया कि मंत्रिपरिषद ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के विरुद्ध दर्ज मामलों की समीक्षा और जांच के लिए, जिन्हें न्यायालय से वापस लिया जाना है, मंत्रिपरिषद उप समिति के गठन को स्वीकृति दी है।
अधिकारियों ने बताया कि यह समिति जांच के बाद प्रकरणों को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत करेगी। यह निर्णय छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जारी छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत पुनर्वास नीति-2025 के प्रावधानों के अनुरूप है, जिसके अंतर्गत आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के अच्छे आचरण तथा नक्सलवाद उन्मूलन में दिए गए योगदान को ध्यान में रखकर उनके विरुद्ध दर्ज मामलों के निराकरण पर विचार का प्रावधान है।
उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के खिलाफ दर्ज मामलों की वापसी की प्रक्रिया के लिए जिला स्तरीय समिति के गठन का प्रावधान किया गया है। यह समिति आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली के आपराधिक मामलों की वापसी के लिए रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को प्रस्तुत करेगी। पुलिस मुख्यालय इस पर अपनी राय सहित प्रस्ताव भेजेगा।
शासन द्वारा विधि विभाग की राय प्राप्त कर मामलों को मंत्रिपरिषद उप समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। उपसमिति द्वारा अनुशंसित मामलों को अंतिम अनुमोदन के लिए मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय अधिनियम अथवा केंद्र सरकार से संबंधित मामलों के लिए भारत सरकार से आवश्यक अनुमति प्राप्त की जाएगी। अन्य मामलों को अदालत में लोक अभियोजन अधिकारी के माध्यम से वापसी की प्रक्रिया के लिए जिला दंडाधिकारी को भेजा जाएगा।
पुलिस के अनुसार, पिछले दो साल में राज्य में 2380 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
अधिकारियों ने बताया कि मंत्रिपरिषद ने राज्य के विभिन्न कानूनों को समयानुकूल और नागरिकों के अनुकूल बनाने के उद्देश्य से 14 अधिनियमों में संशोधन के लिए छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) (द्वितीय) विधेयक, 2025 के प्रारूप का अनुमोदन किया है।
अधिकारियों ने बताया कि कई अधिनियमों में उल्लंघन पर जुर्माना या कारावास के प्रावधान होने से न्यायिक प्रक्रिया लंबी हो जाती है, जिससे आम नागरिक और व्यवसाय दोनों अनावश्यक रूप से प्रभावित होते हैं। व्यापार सुगमता और जीवन सुगमता को बढ़ावा देने के लिए इन प्रावधानों का सरलीकरण आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि इससे पहले, राज्य सरकार द्वारा आठ अधिनियमों के 163 प्रावधानों में संशोधन करते हुए छत्तीसगढ़ जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) अधिनियम, 2025 अधिसूचित किया गया है। अब 11 विभागों के 14 अधिनियमों के 116 प्रावधानों को भी सरल और अधिक प्रभावी बनाने के लिए यह विधेयक लाया जाएगा।
अधिकारियों ने बताया कि इस विधेयक में छोटे उल्लंघनों के लिए प्रशासकीय शास्ति का प्रावधान रखा गया है, जिससे मामलों का त्वरित निपटारा होगा, अदालतों का बोझ कम होगा और नागरिकों को तेजी से राहत मिल सकेगी। साथ ही, कई अधिनियमों में दंड राशि लंबे समय से अपरिवर्तित होने के कारण प्रभावी कार्यवाही बाधित होती थी, इस विधेयक से वह कमी भी दूर होगी। इन संशोधनों से सुशासन को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जहां जन विश्वास विधेयक का द्वितीय संस्करण लाया जा रहा है।
भाषा संजीव