अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन के तुरंत बाद चुनावों की घोषणा होगी ताकि चुनौती न दी जा सके: ममता
जितेंद्र धीरज
- 09 Dec 2025, 08:20 PM
- Updated: 08:20 PM
(तस्वीरों के साथ)
कूच बिहार, नौ दिसंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग नई मतदाता सूची को लेकर कानूनी चुनौतियों से बचने के लिए विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के बाद फरवरी में अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करेगा और उसे तुरंत बाद राज्य विधानसभा चुनावों की घोषणा करेगा।
ममता बनर्जी ने यहां रास मेला मैदान में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि एसआईआर एक “सुनियोजित राजनीतिक षड्यंत्र” है, जिसे 2026 के चुनावों से कुछ महीने पहले “नाम हटाने, मतों को विभाजित करने और नागरिकों को डराने” के लिए अंजाम दिया गया है।
उन्होंने कहा, “वे अंतिम सूची प्रकाशित करने के अगले ही दिन चुनावों की घोषणा कर देंगे ताकि किसी को अदालत जाने का समय ही न मिले। यही उनकी साजिश है। कानूनी लड़ाई मैं अदालतों पर छोड़ दूंगी लेकिन हम राजनीतिक रूप से लड़ेंगे।”
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि आयोग द्वारा चार नवंबर को एसआईआर शुरू किये जाने से लोगों, खासकर अल्पसंख्यकों, प्रवासी कामगारों और विवाहित महिलाओं के बीच डर का माहौल है।
उन्होंने पूछा, “इस देश में जीवन भर भारतीय नागरिक के रूप में रहने के बाद, अब हमसे फिर से अपनी नागरिकता साबित करने के लिए कहा जा रहा है। इससे ज्यादा अपमानजनक और क्या हो सकता है?”
ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर निशाना साधते हुए कहा कि यह सब ‘जानबूझकर’ चुनाव से पहले किया गया है।
उन्होंने कहा, “आप पिछले दो साल में कभी भी एसआईआर कर सकते थे। चुनाव से पहले अचानक इतनी जल्दबाजी क्यों? और कितना जल्दी करेंगे?”
मुख्यमंत्री ने केंद्र में सत्तारूढ़ पार्टी पर ‘दो महीने के भीतर’ मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया, “जीवित मतदाताओं को मृत दिखाया जा रहा है और विवाहित महिलाओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं।”
ममता ने दावा किया, “कभी वे (केंद्र सरकार)‘नोटबंदी’ करते हैं, अब वे वोटबंदी कर रहे हैं। उनकी साजिश एक करोड़ मतदाताओं को हटाने की है।”
मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि अगर राज्य में भाजपा की सरकार बनती है, तो बंगाल अपनी पहचान खो देगा।
उन्होंने कहा, “अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो बंगाल बर्बाद हो जाएगा। आपकी पहचान, सम्मान और भाषा का सफाया कर दिया जाएगा। वे बंगाल को निरुद्ध शिविर में बदलना चाहते हैं। लेकिन यहां ऐसा कोई शिविर कभी नहीं बनने दिया जाएगा।”
ममता बनर्जी ने भाजपा शासित अन्य राज्यों से तुलना करते हुए कहा, “डबल इंजन’ वाली सरकार ने उत्तर प्रदेश और असम में ‘निरुद्ध शिविर’ स्थापित किए हैं। ओडिशा में हमारे प्रवासी मजदूरों को बांग्ला बोलने के लिए परेशान किया जाता है। यही बात दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्यप्रदेश में भी हो रही है। और उन्हें लगता है कि वे बंगाल की भाषा और संस्कृति जाने बिना ही उसे चला लेंगे?”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा चुनावों के दौरान राजबंशी समुदाय की बात करती है लेकिन चुनाव खत्म होते ही कूचबिहार और अलीपुरद्वार के लोगों को ‘असम से नोटिस’ मिलने लगते हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा, “किसी को भी जवाब देने के लिए असम जाने की जरूरत नहीं है। एक राज्य दूसरे राज्य के शासन में दखल नहीं दे सकता।”
ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि वैध राष्ट्रीयता दस्तावेज होने के बावजूद सुनाली खातून और उनके परिवार को सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने बांग्लादेश धकेल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा, “वह गर्भवती थीं। उन्हें प्रताड़ित किया गया और उन्हें खाना नहीं दिया गया। हमने उन्हें आर्थिक मदद दी और जेल से रिहा करवाया लेकिन चार अन्य लोग अब भी वहां फंसे हुए हैं। हम उन्हें वापस लाएंगे।”
सुनाली खातून नाम की गर्भवती महिला को इस वर्ष जून में अवैध प्रवासी होने के संदेह में उसके परिवार के दो सदस्यों और अन्य लोगों के साथ बांग्लादेश निर्वासित कर दिया गया था।
उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद शुक्रवार को वह अपने आठ वर्षीय बेटे के साथ भारत लौट आई।
ममता ने यह भी दावा किया कि अगर तृणमूल कांग्रेस सरकार ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को रोक दिया होता तो केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लगा देती।
उन्होंने आरोप लगाया, “वे (भाजपा) मौके की तलाश में थे। अगर हमने एसआईआर को रोक दिया होता, तो यहां राष्ट्रपति शासन लागू हो जाता। यह उनकी चाल थी।”
मुख्यमंत्री ने मतदाताओं से अपील की कि वे सुनिश्चित करें कि उनके नाम मतदाता सूची में शामिल हों। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को घबराने की जरूरत नहीं है।
उन्होंने उपस्थित लोगों से कहा, “सुनवाई में जरूर आएं और सभी दस्तावेज साथ लाएं। अगर कोई दस्तावेज छूट जाए, तो सहायता बूथ पर जाकर सूचित करें।”
ममता ने साथ ही पार्टी कार्यकर्ताओं, बीएलए (बूथ स्तरीय एजेंट)और स्थानीय नेताओं को हर चरण में मतदाताओं की सहायता करने का निर्देश दिया।
उन्होंने एसआईआर प्रक्रिया की वजह से जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को दो-दो लाख रुपये की अनुग्रह राशि प्रदान करने की घोषणा की और कहा कि अस्पताल में भर्ती लोगों को पूरी चिकित्सा सहायता मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, “केंद्र बीएलओ से काम करवाएगा, राज्य को उन्हें वेतन देना होगा और फिर वे हमारा पैसा रोक देंगे। वे लगभग एक करोड़ पुलिसकर्मियों को तब भी तैनात करेंगे, जब उनकी कोई जरूरत नहीं होगी और सारा खर्च राज्य पर डाल दिया जाएगा।”
तृणमूल अध्यक्ष ने अप्रत्याशित तरीके से केंद्रीय बलों को चुनौती देते हुए कहा, ‘‘बीएसएफ से मत डरो। अगर वे तुम्हें परेशान करते हैं, तो महिलाओं को अग्रिम पंक्ति में रखो। मैं देखती हूं कि महिलाओं की शक्ति ज़्यादा मज़बूत है या भाजपा की।’’
उन्होंने यह भी जोर देकर कहा कि बंगाल में किसी को भी अपनी भाषा बोलने के कारण बाहर नहीं निकाला जा सकता।
ममता ने कहा, “जब तक हम (तृणमूल कांग्रेस) सत्ता में हैं, कोई भी आपको बांग्ला, राजबंशी या कामतापुरी बोलने के कारण बेदखल नहीं कर सकता।”
उन्होंने भाजपा पर चुनाव के दौरान अल्पसंख्यक मतों को बांटने के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने और अन्य मौकों पर उन्हीं लोगों को निशाना बनाने का आरोप लगाया।
भाषा जितेंद्र