कांग्रेस ने पटेल, आंबेडकर, बोस की विरासत को समाप्त करने की कोशिश की: भाजपा
देवेंद्र पारुल
- 07 Dec 2025, 08:39 PM
- Updated: 08:39 PM
नयी दिल्ली, सात दिसंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने रविवार को कहा कि राष्ट्र गीत ‘वंदे मातरम’ की वर्षगांठ पर लोकसभा में होने वाली चर्चा के दौरान जवाहरलाल नेहरू की ‘‘असलियत’’ सामने आ जाएगी। पार्टी ने कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के इस आरोप को लेकर उन पर निशाना साधा कि सत्तारूढ़ गठबंधन का मुख्य उद्देश्य देश के पहले प्रधानमंत्री (नेहरू) को बदनाम करना है।
भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सिर्फ नेहरू की विरासत को जीवित रखने के लिए सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. भीम राव आंबेडकर और सुभाष चंद्र बोस जैसे नेताओं की विरासत को ‘‘समाप्त’’ करने का प्रयास किया।
उन्होंने कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष से नेहरू-गांधी परिवार को बढ़ावा देना बंद करने को कहा।
पुरी लोकसभा क्षेत्र से भाजपा सांसद ने दिल्ली में संवाददाताओं से कहा, ‘‘जहां तक नेहरू की विरासत को खत्म करने का सवाल है, तो ‘नेशनल हेराल्ड’ मामले में जमानत पर बाहर आए तथाकथित वर्तमान गांधी परिवार के अलावा उनकी विरासत को सबसे बेहतर तरीके से कौन खत्म कर सकता है।’’
उनका इशारा सोनिया और उनके बेटे तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की ओर था।
गांधी परिवार का नाम लिए बिना पात्रा ने कहा कि हाल में उनके खिलाफ ‘नेशनल हेराल्ड’ पर कथित रूप से कब्जा करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है।
‘नेशनल हेराल्ड’ की शुरुआत नेहरू ने की थी।
पात्रा ने कहा, ‘‘अगर वे नेहरू की विरासत को कलंकित नहीं कर रहे हैं, तो फिर ऐसा करने की कोशिश कौन कर रहा है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘जब कल संसद में ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा होगी, तो मुझे लगता है कि नेहरू जी की असलियत सभी के सामने आ जाएगी; वह फिर से बेनकाब हो जाएंगे।’’
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर सोमवार को लोकसभा में चर्चा की शुरुआत करेंगे। इस दौरान राष्ट्र गीत के बारे में कई महत्वपूर्ण और अज्ञात पहलुओं के सामने आने की संभावना है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मंगलवार को राज्यसभा में चर्चा की शुरुआत करेंगे।
लोकसभा में ‘राष्ट्र गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर चर्चा’ सोमवार के लिए सूचीबद्ध है और इस पर बहस के लिए 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया है।
सोनिया के इस आरोप पर कि नेहरू की बहुमुखी विरासत को मिटाने और इतिहास को फिर से लिखने का एक सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है, पात्रा ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा केवल यह सुनिश्चित करने की कोशिश कर रही है कि नेताओं को उचित मान्यता मिले।
उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा इतिहास को फिर से लिखने का प्रयास नहीं कर रही है। भाजपा इतिहास को सुधारने और उन लोगों को उचित मान्यता देने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने वास्तव में इस देश की स्वतंत्रता और विभिन्न अन्य पहलुओं में योगदान दिया।’’
पात्रा ने आरोप लगाया, ‘‘अगर कांग्रेस में लोकतांत्रिक तरीके से मतदान प्रणाली अपनाई गई होती, तो नेहरू न तो देश के पहले प्रधानमंत्री बनते और न ही उनकी कोई विरासत होती। सरदार पटेल को दरकिनार कर दिया गया।’’
कांग्रेस नेता के इस आरोप पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कि नेहरू को निशाना बनाने वाले लोग ऐसी विचारधारा से जुड़े हैं, जिसकी देश के स्वतंत्रता आंदोलन और संविधान निर्माण में कोई भूमिका नहीं थी, भाजपा नेता ने कहा कि यह टिप्पणी ऐसे व्यक्ति की ओर से आ रही है, जिसका इस देश से कोई संबंध ही नहीं है।
पात्रा ने कहा, ‘‘सोनिया गांधी जी, आपको यह सवाल नहीं उठाना चाहिए था... ऐसा इसलिए क्योंकि देश यह सवाल पूछेगा कि सोनिया गांधी, जिन्हें एंटोनिया माइनो के नाम से जाना जाता था, उन्होंने और उनके परिवार ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में क्या भूमिका निभाई थी?’’
उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी जो यहां हैं, हमने किसी न किसी रूप में, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, स्वतंत्रता संग्राम में योगदान दिया है और हिस्सा लिया है। लेकिन आप तो इस देश की भी नहीं थीं। इसलिए आप यह सवाल नहीं पूछिए कि हमने स्वतंत्रता संग्राम में क्या योगदान दिया।’’
भाजपा नेता ने सोनिया पर उनकी इस टिप्पणी के लिए भी निशाना साधा कि नेहरू धर्मनिरपेक्षता में दृढ़ विश्वास रखते थे।
उन्होंने आरोप लगाया कि नेहरू के लिए धर्मनिरपेक्षता की केवल वही परिभाषा महत्वपूर्ण थी, जिसमें भगवान राम का अस्तित्व न हो।
पात्रा ने कहा, ‘‘कल जब ‘वंदे मातरम’ पर चर्चा होगी, तो मुझे लगता है कि नेहरू पर फिर से बहस और चर्चा होगी तथा वह बेनकाब हो सकते हैं।’’
भाजपा नेता ने महात्मा गांधी की हत्या पर सोनिया की टिप्पणी को लेकर उन पर निशाना साधा और कहा कि वह बार-बार महात्मा गांधी की मौत के लिए एक विचारधारा को जिम्मेदार ठहराती हैं, क्योंकि उन्हें देश की न्यायिक व्यवस्था और यहां तक कि उच्चतम न्यायालय पर भी भरोसा नहीं है।
भाषा
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