बंगाल की सीमा से लगी नदियों में मछलियों की मौत के आर्थिक असर पर कोई अध्ययन नहीं किया गया : केंद्र
राजेश राजेश अविनाश
- 03 Dec 2025, 08:18 PM
- Updated: 08:18 PM
नयी दिल्ली, तीन दिसंबर (भाषा) केंद्र ने पश्चिम बंगाल की माथाभांगा और चुरनी नदियों में मछलियों के मरने के आर्थिक असर या पानी के पारिस्थितिकी तंत्र पर असर का पता लगाने के लिए कोई विशिष्ट आकलन नहीं किया है। केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने बुधवार को राज्यसभा को यह जानकारी दी।
सिंह ने कहा कि सरकार ने देश भर में नदी प्रदूषण को दूर करने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं, लेकिन इन नदियों पर निर्भर मछुआरों पर असर का आकलन करने के लिए कोई खास अध्ययन नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि हालांकि, ‘सेंट्रल इनलैंड फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईसीएआर-सीआईएफआरआई), कोलकाता ने वर्ष 2005-2010 और वर्ष 2024-2025 के दौरान शिवनिवास से पायराडांगा तक चुरनी नदी के 95 किलोमीटर लंबे हिस्से में सर्वेक्षण किए।
चुरनी माथाभांगा नदी की एक सहायक नदी है।
मंत्री ने कहा कि सर्वेक्षण से पता चला है कि माथाभांगा में बांग्लादेश के दरसाना इलाके से चीनी मिल का गंदा पानी समय-समय पर आता है, जिससे घुली हुई ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है और मछलियां अक्सर मर जाती हैं।
अध्ययन में यह भी बताया गया कि गंगा नदी के संगम के पास की जगहों, जिनमें राबोनबोर, कालीनारायणपुर और अरनघाटा शामिल हैं, में मछलियों की विविधतायें कम हो रही हैं।
मंत्री ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के बीच 54 सीमावर्ती नदियां हैं और इन नदियों से जुड़े सभी मामलों पर पहले से स्थापित आपसी प्रणाली के ज़रिए बात की जाती है।
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, बांग्लादेश में दरसाना चीनी मिल से निकलने वाले गंदे पानी की वजह से माथाभांगा-चुरनी नदी प्रणाली में प्रदूषण का मुद्दा, भारत-बांग्लादेश संयुक्त नदी आयोग की तकनीकी स्तरीय बैठकों और सीमा सुरक्षा बल तथा बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश की बैठकों में बार-बार उठाया गया है।
सात मार्च, 2025 को हुई एक बैठक के दौरान, बांग्लादेश ने बताया कि दरसाना चीनी मिल के लिए जल शोधन संयंत्र चालू कर दिया गया है और पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। लेकिन, कुछ मानक अब भी तय सीमा से नीचे हैं, और बांग्लादेश ने कहा है कि वह इस संबंध में कार्रवाई करेगा। 25 से 28 अगस्त, 2025 तक हुई बातचीत के दौरान यह मुद्दा फिर उठाया गया।
मंत्री ने कहा कि सरकार बांग्लादेशी अधिकारियों के साथ इस मामले को आगे बढ़ा रही है।
भाषा राजेश राजेश