कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति के लिए अवमानना कार्रवाई की याचिका पर तमिलनाडु सरकार से जवाब तलब
संतोष शफीक
- 07 Nov 2025, 06:24 PM
- Updated: 06:24 PM
नयी दिल्ली, सात नवंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने तमिलनाडु सरकार से शुक्रवार को उस याचिका पर जवाब मांगा जिसमें उसके पिछले आदेशों का पालन नहीं करने और राज्य में कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति के लिए अवमानना कार्रवाई का अनुरोध किया गया है।
प्रधान न्यायाधीश बी आर गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने किशोर कृष्णस्वामी द्वारा दायर अवमानना याचिका पर तमिलनाडु सरकार को नोटिस जारी कर तीन सप्ताह में जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि अदालत ने आठ सितंबर को एक अन्य मामले में एक आदेश पारित किया था, जिसमें राज्य को संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा की गई सिफारिशों के आधार पर तुरंत एक नियमित डीजीपी नियुक्त करने का निर्देश दिया गया था।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उस समय सूचित किया था कि 29 अगस्त को यूपीएससी को नामों का एक पैनल सौंपा गया था।
भूषण ने कहा, ‘‘आदेश आठ सितंबर को दिया गया था और आज सात नवंबर है, इसके बावजूद राज्य कार्यवाहक डीजीपी के साथ काम कर रहा है। आज तक नियमित डीजीपी की नियुक्ति नहीं हुई है।’’
कृष्णास्वामी द्वारा दायर याचिका में कहा गया है, ‘‘प्रतिवादी/अवमाननाकर्ता ने प्रभारी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) की नियुक्ति करके और संघ लोक सेवा आयोग द्वारा अनुशंसित तीन आईपीएस अधिकारियों के अंतिम पैनल में से उम्मीदवार की नियुक्ति पर रोक लगाकर जानबूझकर अवमानना का कार्य किया है।’’
इसमें कहा गया है कि प्रकाश सिंह मामले में 22 सितंबर, 2006 और तीन जुलाई, 2018 को पारित अदालत के आदेशों के अनुसार, कार्यवाहक डीजीपी की अवधारणा कानून के लिए विदेशी और अज्ञात है।
अवमानना याचिका में कहा गया है, ‘‘स्पष्ट और सकारात्मक निर्देशों के बावजूद, प्रतिवादी/अवमाननाकर्ता ने 31 अगस्त, 2025 को आईपीएस अधिकारी जी. वेंकटरमन को तमिलनाडु के डीजीपी के पद पर तदर्थ नियुक्ति के तहत नियुक्त किया, जो प्रकाश सिंह मामले में इस अदालत द्वारा पारित कई निर्देशों का सीधा उल्लंघन है।’’
याचिकाकर्ता ने कहा है कि पिछले डीजीपी का पद 31 अगस्त को रिक्त हो गया था और राज्य सरकार को इसकी जानकारी होने के कारण, रिक्ति का पूर्वानुमान लगाना चाहिए था और इस पद पर उपयुक्त उम्मीदवार की नियुक्ति के लिए पहले से ही उचित और आवश्यक कदम उठाने चाहिए थे।
भाषा संतोष