‘एक देश, एक चुनाव’ से दलगत राजनीति घटेगी, विकास बढ़ेगा : भाजपा महासचिव
हर्ष रंजन
- 15 Sep 2025, 08:22 PM
- Updated: 08:22 PM
इंदौर (मध्यप्रदेश), 15 सितंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय महासचिव सुनील बंसल ने ‘एक देश, एक चुनाव’ की अवधारणा की पुरजोर वकालत करते हुए सोमवार को कहा कि देश में अलग-अलग चुनाव एक साथ कराए जाने से दलगत राजनीति घटेगी और विकास बढ़ेगा।
बंसल ने इंदौर में ‘स्टूडेंट्स फॉर वन नेशन वन इलेक्शन फोरम’ के आयोजित प्रदेशस्तरीय छात्र नेता सम्मेलन में यह बात कही।
उन्होंने बार-बार होने वाले चुनावों को ‘विकास के मार्ग के गति अवरोधक’ करार दिया और कहा,‘‘देश में जितने ज्यादा चुनाव होंगे, उतनी ज्यादा (दलगत) राजनीति भी होगी जबकि विकास कम होगा। बार-बार चुनाव होने से सियासी आरोप-प्रत्यारोप तेज हो जाते हैं जिससे सामाजिक वैमनस्य बढ़ता है। यह बात पक्की है कि देश में अलग-अलग चुनाव एक साथ होने से राजनीति कम होगी और विकास ज्यादा होगा।’’
उन्होंने कहा,"वर्ष 1995 से लेकर अब तक पिछले 30 साल में एक भी साल खाली नहीं गया, जब देश में कहीं न कहीं चुनाव नहीं हो रहे हों। बार-बार होने वाले चुनावों से देश की अर्थव्यवस्था पर बहुत बड़ा प्रभाव पड़ता है।’’
बंसल के मुताबिक एक सर्वेक्षण की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि देश में हर पांच साल के भीतर लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव कराने में निर्वाचन आयोग, राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को कुल मिलाकर पांच से सात लाख करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं।
भाजपा महासचिव ने यह भी कहा कि बार-बार चुनाव होने से कई सरकारों में ‘नीतिगत लकवे’ की स्थिति नजर आती है और वे अक्सर 'कठोर निर्णय' नहीं ले पाती हैं।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव जीतने के लिए राजनीतिक दलों में लोकलुभावन योजनाओं की घोषणा की होड़ लग जाती है, लेकिन सरकारी खजाने की तंगी के चलते सत्ता में आने पर उनके लिए इन योजनाओं का क्रियान्वयन मुश्किल हो जाता है।
भाजपा महासचिव ने आरोप लगाया कि हिमाचल प्रदेश का विधानसभा चुनाव जीतने के बाद कांग्रेस मतदाताओं से किए गए अपने लोकलुभावन वादों को पूरा करने में विफल रही है।
उन्होंने कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ की अवधारणा पर अमल से ‘परिवारवाद की राजनीति’ भी रुकेगी और अपेक्षाकृत ज्यादा युवाओं को चुनाव लड़ने का मौका मिलेगा।
सम्मेलन को मध्यप्रदेश की भाजपा इकाई के अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और सूबे के काबीना मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी संबोधित किया।
भाषा हर्ष