लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने सरकार से अमेरिका के आयात शुल्क मुक्त व्यापार पर स्पष्टीकरण मांगा
सुभाष वैभव
- 21 Mar 2025, 07:00 PM
- Updated: 07:00 PM
नयी दिल्ली, 21 मार्च (भाषा) अमेरिकी कृषि और दुग्ध उत्पादों के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दिये जाने संबंधी खबरों को लेकर लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने शुक्रवार को केंद्र से स्पष्टीकरण देने की मांग की और सरकार को आगाह किया कि इस तरह के कदम से भारतीय किसानों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
कृषि मंत्रालय के लिए अनुदान की मांगों पर चर्चा के दौरान सदन में कांग्रेस सदस्य चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा, ‘‘अमेरिका के राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) ने कहा है कि ‘हम जवाबी शुल्क लगाएंगे’। ऐसे में भारत सरकार की क्या तैयारी है?’’
उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका के राष्ट्रपति का कहना है कि (भारत) सरकार मान गई है कि वह अनाज पर आयात शुल्क कम करेगी। मैं सरकार से पूछना चाहता हूं कि अगर आप आयात शुल्क कम कर देंगे तो देश के अनाज का क्या होगा?’’
उन्होंने इस पर सरकार से जवाब देने की मांग की।
द्रमुक के टी एम सेल्वागणपति ने अमेरिकी गेहूं आयात पर निर्भरता कम करने की भारत की लंबे समय से जारी नीति को पलटने के लिए केंद्र की आलोचना की।
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘एमएस स्वामीनाथन और डॉ. सी. सुब्रमण्यम के नेतृत्व में हरित क्रांति की बदौलत भारत ने अमेरिका से पीएल-480 गेहूं आयात पर अपनी निर्भरता को खत्म कर लिया। लेकिन अब सरकार इस प्रवृत्ति को उलट रही है।’’
द्रमुक सांसद ने उन खबरों पर भी चिंता जताई, जिनमें कहा गया था कि सरकार ने अमेरिका से कृषि और दुग्ध उत्पादों के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति देने पर सहमति जताई है।
उन्होंने कहा, ‘‘यहां तक कि (अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड) ट्रंप ने भी कहा है कि भारत ने अमेरिकी शर्तों पर सहमति जताई है। मैक्सिको, चीन और यहां तक कि यूरोपीय देश भी इसका विरोध कर रहे हैं, लेकिन हम रीढ़विहीन हो चुके हैं। यह हमारे किसानों के लिए एक बड़ा खतरा होगा।’’
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया।
राकांपा (शरदचंद्र पवार) के अमोल रामसिंह कोल्हे ने अमेरिका और भारत के किसानों के बीच, खासकर सोयाबीन उत्पादन में, असमानता की ओर इशारा करते हुए कहा, ‘‘अमेरिका में सत्ता परिवर्तन के बाद, वे मांग कर रहे हैं कि भारत अपना कृषि बाजार खोले। यह हमारे किसानों के लिए एक बड़ा संकट है, लेकिन सरकार ने इस मामले पर कोई स्पष्टता नहीं दी है।’’
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