खेल निकायों में शुचिता, निष्पक्षता, स्वायत्तता लाने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत: न्यायालय
नेत्रपाल प्रशांत
- 04 Feb 2025, 10:06 PM
- Updated: 10:06 PM
नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को कहा कि भारतीय खेल महासंघों में शुद्धता, निष्पक्षता, स्वायत्तता और स्वतंत्रता लाने तथा ऐसे निकायों पर निहित स्वार्थ से “एकाधिकार” जमाने वाले व्यक्तियों को बाहर करने के लिए “कड़े कदम” उठाने की आवश्यकता है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह सीबीआई जांच और एशियाई कबड्डी महासंघ के ‘‘तथाकथित’’ अध्यक्ष द्वारा ‘एमेच्योर कबड्डी फेडरेशन ऑफ इंडिया’ (एकेएफआई) के प्रशासक को लिखे गए पत्र पर निर्देश लें।
पीठ ने कहा, ‘‘मौखिक अभिवेदनों को ध्यान में रखते हुए, और एशियाई कबड्डी महासंघ के एक तथाकथित अध्यक्ष द्वारा इस्तेमाल की गई आपत्तिजनक भाषा का संज्ञान लेते हुए, हमें ऐसा लगता है कि चुनाव प्रक्रिया में शुद्धता, निष्पक्षता, स्वायत्तता और स्वतंत्रता लाने तथा विशेष तौर पर खेल महासंघों पर निहित स्वार्थ से “एकाधिकार” जमाने वाले व्यक्तियों को अपदस्थ करने के लिए कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है।’’
न्यायालय ने मेहता से यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश लेने को कहा कि घरेलू कबड्डी खिलाड़ियों या अन्य खिलाड़ियों को ईरान में एशियाई कबड्डी चैंपियनशिप सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति दी जाए।
पीठ ने केंद्र को विवादों के समाधान और कबड्डी महासंघ सहित खेल संघों की मान्यता के लिए राजनयिक माध्यम तलाशने का भी निर्देश दिया।
उसने मेहता से यह देखने को कहा कि क्या एकेएफआई की मतदाता सूची वैध थी और राज्य संघों का प्रतिनिधित्व वास्तव में निर्वाचित या नामांकित व्यक्तियों द्वारा किया गया था, जो राष्ट्रीय महासंघ चुनावों में भाग लेने के हकदार थे।
पीठ ने कहा, ‘‘सबसे पहले, हम यह जानकारी प्राप्त करेंगे और अगर जरूरत पड़ी तो हम एकेएफआई के चुनाव नए सिरे से कराने का आदेश देंगे।’’
इसने मामले की अगली सुनवाई छह फरवरी के लिए सूचीबद्ध कर दी।
शीर्ष अदालत दो राष्ट्रीय कबड्डी खिलाड़ियों प्रियंका और पूजा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय कबड्डी महासंघ से असंबद्ध एकेएफआई को उन्हें 20 से 25 फरवरी तक ईरान में होने वाली एशियाई कबड्डी चैंपियनशिप में भेजने के लिए निर्देश दिए जाने का आग्रह किया है।
अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित दो पूर्व खिलाड़ियों ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया है और वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल शंकरनारायणन के माध्यम से अदालत को एकेएफआई के मामलों से अवगत कराया है।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा कि अगर एकेएफआई के शासी निकाय चुनाव में कुछ भी गलत हुआ है, तो अदालत नए सिरे से चुनाव का आदेश देने में संकोच नहीं करेगी और इस बार वह किसी प्रशासक पर निर्भर नहीं होगी।
शंकरनारायणन ने कहा कि जिस व्यक्ति का 40 वर्षों तक एकेएफआई पर नियंत्रण रहा और अब जिसे हटा दिया गया है, वह कबड्डी की अंतरराष्ट्रीय संस्था में रहा और एकेएफआई की संबद्धता को निलंबित करने तथा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में भाग लेने की अनुमति नहीं देने के लिए जिम्मेदार है।
उन्होंने कहा कि इस सबके लिए उसे जेल भेजा जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय कबड्डी महासंघ को एक पक्ष बनाया जाना चाहिए तथा एकेएफआई की संबद्धता बहाल करने का निर्देश दिया जाना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय महासंघ ने पिछले साल जुलाई में एकेएफआई की मान्यता रद्द कर दी थी और कबड्डी टीम को कई वैश्विक आयोजनों में भाग लेने से रोक दिया था।
शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाने वाली महिला खिलाड़ियों ने एकेएफआई की मान्यता बहाल कराने के वास्ते कदम उठाने के लिए केंद्र को भी निर्देश दिए जाने का आग्रह किया।
भाषा
नेत्रपाल