‘किलिंग कैंसर’ पुस्तक में फार्मा उद्योग की चुनौतियों और अनुभवों का खुलासा
Daily World
- 19 Jun 2026, 09:00 PM
- Updated: 09:00 PM
डेलीवर्ल्ड ब्यूरो / चंडीगढ़
फार्मास्युटिकल उद्यमी दंपति अभिनव गर्ग और मेहक अग्रवाल ने शुक्रवार को अपनी पुस्तक ‘किलिंग कैंसर: 13 सीक्रेट्स ऑफ द हाई-स्टेक्स ड्रग मैन्युफैक्चरिंग वर्ल्ड’ का विमोचन किया। लेखकों का दावा है कि पुस्तक दवा निर्माण उद्योग की जटिलताओं, चुनौतियों और जिम्मेदारियों को समझने में मदद करेगी। प्रेस वार्ता के दौरान अभिनव गर्ग ने बताया कि पुस्तक के 13 अध्यायों में रेगुलेटरी अनुपालन, सप्लाई चेन प्रबंधन, उद्यमिता, गुणवत्ता नियंत्रण, उत्पादन संबंधी विफलताओं और नेतृत्व जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है। उन्होंने कहा कि दवा निर्माण उद्योग में लाइसेंस प्राप्त करना केवल शुरुआत होती है और इसके बाद विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों का निरंतर पालन करना पड़ता है।
गर्ग ने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज (जीएमपी) मानकों का अनुपालन, सप्लायर वैलिडेशन, मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी) और नियामकीय दस्तावेजीकरण इस उद्योग का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि व्यवसाय के विस्तार के साथ नियामकीय जिम्मेदारियां भी बढ़ती जाती हैं।
लेखकों के अनुसार, पुस्तक तकनीकी मैनुअल नहीं बल्कि वास्तविक अनुभवों और व्यावहारिक जानकारियों का संकलन है। इसका उद्देश्य उद्यमियों, उद्योग विशेषज्ञों, स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े लोगों और आम पाठकों को यह समझाना है कि दवाएं मरीजों तक किस प्रक्रिया से पहुंचती हैं। मेहक अग्रवाल ने कहा कि पुस्तक लिखने का उद्देश्य लोगों की धारणा और फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग की वास्तविकताओं के बीच मौजूद दूरी को कम करना है। उनके अनुसार दवाओं के पीछे लिए जाने वाले निर्णय, नियम, जोखिम और मानवीय पहलुओं को आमतौर पर नजरअंदाज कर दिया जाता है।
पुस्तक में जीवनरक्षक दवाओं के निर्माण से जुड़ी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला गया है। लेखकों का कहना है कि इस क्षेत्र में त्रुटि की गुंजाइश बेहद कम होती है और किसी भी चूक के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
अभिनव गर्ग ने कहा कि फार्मास्युटिकल संयंत्रों में लिए गए निर्णय सीधे तौर पर मरीजों के जीवन को प्रभावित करते हैं, इसलिए गुणवत्ता, अनुपालन और नेतृत्व की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है।
मेहक अग्रवाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने वर्ष 2024 में फैशन और मॉडलिंग के क्षेत्र में भी कदम रखा था। उन्होंने कहा कि फैशन और फार्मा उद्योग की कार्यशैली अलग-अलग है, लेकिन दोनों क्षेत्रों के अनुभवों ने उनके नेतृत्व और पेशेवर दृष्टिकोण को आकार देने में मदद की है। भारत की वैश्विक फार्मा क्षेत्र में भूमिका का उल्लेख करते हुए लेखकों ने कहा कि देश आज दुनिया में जेनेरिक दवाओं के सबसे बड़े आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश के बद्दी जैसे फार्मा हब्स के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
लेखकों के अनुसार, भारत वैश्विक जेनेरिक दवा निर्यात में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है और भविष्य में जटिल जेनेरिक दवाओं, बायोसिमिलर्स तथा पर्सनलाइज्ड मेडिसिन के क्षेत्र में उसकी भूमिका और बढ़ सकती है। ‘किलिंग कैंसर’ पुस्तक को लेखकों ने अपनी पुत्री काश्वी को समर्पित किया है। उनका कहना है कि यह एक ऐसे स्वास्थ्य तंत्र की उम्मीद का प्रतीक है जो आने वाली पीढ़ियों के लिए अधिक सुरक्षित, मजबूत और जवाबदेह हो।