लुटियंस दिल्ली में 33 विरासत पेड़ों की पहचान, जानकारी के लिए लगाए जाएंगे क्यूआर कोड
शोभना
- 12 Mar 2026, 01:00 PM
- Updated: 01:00 PM
(वरुण भंडारी)
नयी दिल्ली, 12 मार्च (भाषा) नयी दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) ने लुटियंस दिल्ली क्षेत्र में लगभग एक सदी पुराने 33 विरासत पेड़ों की पहचान की है और लोगों को इनके बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए इन पर 'क्विक रिस्पॉन्स' (क्यूआर) कोड वाली पट्टिका लगाने की योजना बनाई है।
अधिकारियों के अनुसार, क्यूआर कोड पट्टिका की मदद से लोग अपने स्मार्टफोन से कोड स्कैन कर इन पेड़ों की देशांतर-अक्षांश स्थिति, अनुमानित आयु, जीवनकाल, वानस्पतिक नाम और सामान्य नाम जैसी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। डिजिटल टैग के माध्यम से इनके फूल आने का मौसम, छत्र (कैनोपी) का आकार, तने की परिधि और अन्य वनस्पतिक विशेषताओं की जानकारी भी उपलब्ध हो सकती है।
एनडीएमसी द्वारा कराए गए बागवानी सर्वेक्षण के अनुसार, पहचाने गए 33 पेड़ों में से बरगद (फिकस बेंघालेन्सिस) के 11 पेड़ लुटियंस क्षेत्र में हैं, जिनकी आयु लगभग 100 वर्ष या उससे अधिक है।
एक अधिकारी ने बताया कि तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में स्थित बरगद के पेड़ की तने की परिधि 16 मीटर है, जो दर्ज किए गए सभी विरासत पेड़ों में सबसे अधिक है।
सर्वेक्षण के अनुसार, लुटियंस क्षेत्र में तीन अर्जुन (टर्मिनेलिया अर्जुना), तीन चिलखन (फिकस रेटुसा), दो सेमल (बॉम्बैक्स सीबा) और दो पिलखन (फिकस इन्फेक्टोरिया) के पेड़ भी विरासत पेड़ों की सूची में शामिल किए गए हैं।
दिलचस्प रूप से तीन उल्लू पेड़ (ऐलेंथस एक्सेल्सा) भी सूची में शामिल हैं। इनमें से एक नेहरू पार्क में स्थित है और आगंतुकों के बीच लोकप्रिय है।
माहरुख के पड़े को उल्लू पेड़ भी कहा जाता है। एक अधिकारी ने बताया, "नेहरू पार्क में स्थित माहरुख का पेड़ विरासत सूची में शामिल है। पेड़ की सटीक आयु अभी निर्धारित नहीं की गई है, लेकिन यह विरासत पेड़ों में से एक है।"
सर्वेक्षण में तीन जड़ी (फिकस त्सिएला), चार पीपल (फिकस रेलिजियोसा) और एक कक्कड़ (गरुगा पिन्नाटा) के पेड़ों की भी पहचान की गई है। इसके अलावा लोधी गार्डन में मोहम्मद शाह सैयद की कब्र के पास स्थित बुद्ध नारियल (प्टेरिगोटा अलाटा) का एक पेड़ भी सूची में शामिल है।
यह पहल राजधानी में क्यूआर कोड वाले पेड़ों के एनडीएमसी के पूर्व के प्रयोगों पर आधारित है। पहले चरणों में लोधी गार्डन के कई पेड़ों पर क्यूआर कोड टैग लगाए गए थे, जिससे लोग अपने फोन के माध्यम से विभिन्न प्रजातियों के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
एनडीएमसी के उपाध्यक्ष कुलजीत चहल ने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य दिल्ली के पुराने पेड़ों के बारे में जनजागरूकता बढ़ाना और लोगों को उनके पारिस्थितिक तथा विरासत महत्व के बारे में जानने के लिए प्रेरित करना है।
भाषा मनीषा शोभना
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