समिति ने वाशिंगटन और पेरिस में भारतीय सांस्कृतिक केंद्र बनाने में 'विफलताओं' की ओर इशारा किया
माधव
- 05 Feb 2026, 01:57 PM
- Updated: 01:57 PM
नयी दिल्ली, पांच फरवरी (भाषा) संसद की एक समिति ने 2022 की कैग की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए अमेरिका और फ्रांस में भारत के मिशनों द्वारा भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना में 'अनियमितताओं' की ओर इशारा किया है।
रिपोर्ट में कहा गया कि 2013 में वाशिंगटन में खरीदी गई 103 साल पुरानी संपत्ति में ढांचा संबंधी दिक्कतें होने की जानकारी होने के बावजूद, विदेश मंत्रालय ने इसे खरीदने से मना नहीं किया, और परिणामस्वरूप ऐसी देनदारियां ले लीं जिनसे बचा जाना चाहिए था।
लोक लेखा समिति (2025-2026) ने बुधवार को लोकसभा में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में, विदेशों में कई भारतीय मिशन और पोस्ट द्वारा प्रवासी भारतीय नागिक (ओसीआई) योजना में वीजा शुल्क की गणना के लिए विदेश मंत्रालय द्वारा निर्दिष्ट स्थानीय मुद्राओं के लिए संशोधित विनिमय दर लागू करने में 'विफलता' को रेखांकित किया है, जिससे 2017-2020 की अवधि के दौरान 58.23 करोड़ रुपये का राजस्व घाटा हुआ।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इसलिए समिति विदेश मंत्रालय से गलत विनिमय दरों और वाशिंगटन तथा पेरिस में भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना, दोनों मामलों में 'पूरी जांच करने' और मुख्यालय तथा मिशनों/पोस्टों में दोषी अधिकारियों पर 'जवाबदेही तय करने' का आग्रह करती है।
समिति ने अधिकारियों के खिलाफ 'उचित प्रशासनिक कार्रवाई' की सिफारिश की है, जिसमें मंत्रालय के निर्देशों का पालन न करने, उचित रिकॉर्ड नहीं रखने, मंत्रालय के आदेशों को दरकिनार करने और वाशिंगटन तथा पेरिस में अधिग्रहीत संपत्तियों का अक्षम और विलंबित उपयोग तथा नवीनीकरण में लंबे समय तक लगने के लिए जहां भी आवश्यक हो, अनुशासनात्मक कार्यवाही शामिल है।
रिपोर्ट - ''प्रवासी भारतीय नागरिक योजना के लिए शुल्क तय करने में गलत विनिमय दर लागू करने के कारण शुल्क का कम संग्रह और वाशिंगटन एवं पेरिस में भारतीय मिशनों द्वारा भारतीय सांस्कृतिक केंद्रों की स्थापना में अनियमितताएं''- विदेश मंत्रालय से संबंधित 2022 की भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट के पैराग्राफ 2.1 और 2.2 पर आधारित है।
समिति ने पाया है कि अधिकारियों द्वारा निर्धारित वित्तीय नियमों और विनिमय दरों के संबंध में मौजूदा निर्देशों से लगातार विचलन, दस्तावेज के रूप में रखने, मंत्रालय द्वारा अपर्याप्त निगरानी और प्रॉपर्टी खरीदने में उचित सतर्कता की कमी 'लापरवाही की संस्कृति' को दर्शाती है और इसके परिणामस्वरूप 'सरकारी खजाने को काफी वित्तीय और प्रतिष्ठा का नुकसान' हुआ है।
इसने इस बात पर ज़ोर दिया कि जवाबदेही, पारदर्शिता और वित्तीय विवेक मंत्रालय और विदेशों में उसके मिशनों के सभी कार्यों को निर्देशित करने वाले मुख्य सिद्धांतों में होने चाहिए।
रिपोर्ट के मुताबिक वाशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास ने अगस्त 2013 में 57.5 लाख डॉलर में 1438 यू-स्ट्रीट स्थित संपत्ति अपना सांस्कृतिक केंद्र बनाने के मकसद से खरीदी थी, जो अब लावारिस हालत में है और किसी भी सांस्कृतिक गतिविधि के लिए अनुपयुक्त है।
भाषा
वैभव माधव
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