विनिर्माण क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से औद्योगिक उत्पादन में मई में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि
योगेश
- 29 Jun 2026, 08:02 PM
- Updated: 08:02 PM
नयी दिल्ली, 29 जून (भाषा) विनिर्माण क्षेत्र के बेहतर प्रदर्शन से औद्योगिक उत्पादन में मई में 5.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
इससे पिछले महीने अप्रैल में इसमें 4.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने एक बयान में कहा कि नई श्रृंखला के तहत मई के लिए औद्योगिक उत्पादन (आईआईपी) के ताजा आंकड़े उत्पादन उत्पादक कीमत सूचकांक (पीपीआई) पर आधारित हैं। यह सूचकांक पहले इस्तेमाल होने वाले थोक मूल्य सूचकांक प्रणाली की तुलना में कीमतों का अधिक सटीक विवरण देता है।
यह नयी श्रृंखला 2022-23 पर आधारित औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का दूसरा मासिक आंकड़ा है।
आईआईपी सूचकांक में 463 मद समूह हैं और पीपीआई को अपनाने से 234 मद समूह पर असर पड़ा है। ये समूह मिलकर कुल सूचकांक भारांश का 36.02 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं। पीपीआई में उत्पादन के मूल्य के आधार पर जानकारी एकत्रित की जाती है।
बयान में कहा गया, ''औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में मई में सालाना आधार पर 5.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई। विनिर्माण क्षेत्र में 5.5 प्रतिशत और बिजली तथा गैस आपूर्ति क्षेत्र में 9.9 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि से औद्योगिक उत्पादन बढ़ा।''
आंकड़ों के अनुसार, मई के दौरान विनिर्माण, बिजली, गैस और पानी की आपूर्ति तथा दूषित जल निकासी और अपशिष्ट प्रंबंधन की वृद्धि दर क्रमशः 5.5 प्रतिशत, 9.9 प्रतिशत और 5.5 प्रतिशत रही। वहीं खनन और उत्खनन क्षेत्र में 1.6 प्रतिशत की गिरावट आई।
विनिर्माण क्षेत्र में, 23 में से 16 औद्योगिक समूह ने मई में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की।
आंकड़ों के अनुसार, मई में सकारात्मक योगदान देने वाले शीर्ष तीन क्षेत्र... मोटर वाहन, ट्रेलर और सेमी-ट्रेलर का विनिर्माण (14.5 प्रतिशत), इलेक्ट्रिकल उपकरण का विनिर्माण (20.8 प्रतिशत) और मूल धातु का विनिर्माण (4.6 प्रतिशत)...था।
इस्तेमाल के आधार पर वर्गीकरण के अनुसार, प्राथमिक वस्तुओं में 2.6 प्रतिशत, पूंजीगत सामान में 12.9 प्रतिशत, मध्यवर्ती वस्तुओं में 5.8 प्रतिशत, बुनियादी ढांचा/निर्माण वस्तुओं में 5.9 प्रतिशत, टिकाऊ उपभोक्ता क्षेत्र में 7.2 प्रतिशत और गैर-टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं में 3.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
उल्लेखनीय है कि 2022–23 के आधार वर्ष के साथ अखिल भारतीय औद्योगिक उत्पादन सूचकांक की नई श्रृंखला एक जून 2026 को जारी की गई।
इसके बाद, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने 15 जून, 2026 को 2022-23 के आधार वर्ष के साथ उत्पादन उत्पादक कीमत सूचकांक श्रृंखला जारी की।
सांख्यिकी मंत्रालय ने कहा कि उत्पादन पीपीआई उत्पादक स्तर की कीमतों को मापने के लिए एक नया और अहम संकेतक है। आईआईपी तैयार करने के लिहाज से यह महत्वपूर्ण है।
बयान के अनुसार, ''डब्ल्यूपीओ से उत्पादन पीपीआई में बदलाव महत्वपूर्ण है क्योंकि आईआईपी में औद्योगिक उत्पादन का एक हिस्सा मूल्य के तौर पर बताया जाता है। आईआईपी में शामिल 463 मद समूह में से 234 मद समूह मूल्य आधारित उत्पादन आंकड़ों का उपयोग करके तैयार किए गये हैं।''
इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि जून, 2026 में आईआईपी वृद्धि बढ़कर 5.7 प्रतिशत होने का अनुमान है। इसका कारण तुलनात्मक आधार वृद्धि की रफ्तार को बनाए रखने में मदद करेगा।
अरोड़ा ने कहा, ''...कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भी जून, 2026 में वृद्धि को समर्थन मिलने की संभावना है। सरकार के लगातार पूंजीगत व्यय से भी पूंजीगत वस्तुओं और बुनियादी ढांचा/निर्माण वस्तुओं की वृद्धि बनी रहने की उम्मीद है।''
इक्रा के प्रधान अर्थशास्त्री राहुल अग्रवाल ने कहा कि सांख्यिकी मंत्रालय ने आईआईपी में शामिल कई मदों के लिए 'डिफ्लेटर' के तौर पर पहले इस्तेमाल होने वाले डब्ल्यूपीआई की जगह अब उत्पादन पीपीआई का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है।
उन्होंने बताया कि इससे विनिर्माण जैसे क्षेत्र की वृद्धि में बड़े बदलाव आए हैं और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों में भी बदलाव होने की संभावना है।
भाषा रमण अजय
अजय योगेश
योगेश
2906 2002 दिल्ली