भाजपा ने मणिपुर विधायक दल के नेता के चुनाव के लिए तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया
संतोष
- 02 Feb 2026, 10:28 PM
- Updated: 10:28 PM
नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संसदीय बोर्ड ने मणिपुर पार्टी विधायक दल के नेता का चुनाव करने के लिए होने वाली बैठक के लिए पार्टी महासचिव तरुण चुघ को सोमवार को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया।
भाजपा का यह कदम पूर्वोत्तर राज्य में एक लोकप्रिय सरकार के संभावित गठन का संकेत देता है।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब मणिपुर से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के विधायक भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व द्वारा बुलाए जाने के बाद राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे, जिसका उद्देश्य राज्य में सरकार के गठन पर चर्चा करना था। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की मौजूदा कानूनी मियाद अगले सप्ताह समाप्त हो रही है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह ने एक बयान में कहा, ''भाजपा संसदीय बोर्ड ने मणिपुर में पार्टी विधायक दल नेता के चुनाव के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ को केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है।''
पूर्वोत्तर के इस राज्य में पहली बार 13 फरवरी, 2025 को मेइती और कुकी समुदायों के बीच महीनों तक चली जातीय हिंसा के बाद छह महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया गया था। अगस्त 2025 में इसे और छह महीने के लिए बढ़ा दिया गया था।
मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा का कार्यकाल 2027 तक है और केंद्र ने उसे निलंबित रखा है।
भाजपा विधायक दल की बैठक मंगलवार को होने की संभावना है। हालांकि, स्पष्ट नहीं है कि बैठक कहां होगी।
सूत्रों के मुताबिक, मणिपुर के करीब 20 विधायक रविवार रात को दिल्ली पहुंचे जबकि बाकी विधायक भाजपा नेतृत्व के निर्देश पर सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे।
मणिपुर के जो नेता दिल्ली आए हैं उनमें पूर्व मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, मौजूदा समय में स्थगित विधानसभा के अध्यक्ष सत्यब्रता सिंह और पूर्व मंत्री वाई खेमचंद सिंह शामिल हैं। भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष ए शारदा देवी भी राष्ट्रीय राजधानी में मौजूद हैं।
सूत्रों के मुताबिक भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले कुछ महीनों में अपने मेइती और कुकी विधायकों, सहयोगी दलों एनपीएफ और एनपीपी और कुछ निर्दलीय विधायकों के साथ अलग-अलग कई बैठकें कीं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या लोकप्रिय सरकार के गठन के लिए राजनीतिक स्थिति अनुकूल है।
उन्होंने बताया कि 14 दिसंबर, 2025 को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बी एल संतोष और पार्टी के पूर्वोत्तर मामलों के समन्वयक संबित पात्रा ने दिल्ली में एक ही छत के नीचे मेइती और कुकी समुदायों से आने वाले भाजपा विधायकों से मुलाकात की।
मणिपुर की 60 सदस्यीय विधानसभा में इस समय भाजपा के 37 विधायक हैं। भाजपा ने 2022 के चुनाव में 32 सीट हासिल की थी लेकिन बाद में जनता दल यूनाइटेड के छह विधायकों में से पांच ने उसका दामन थाम लिया। इसी के साथ सदन में भाजपा विधायकों की संख्या बढ़कर 37 हो गई।
इसके अलावा सदन में नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के छह, नगा पीपुल्स फ्रंट के पांच, कांग्रेस के पांच, कुकी पीपुल्स अलायंस (केपीए) के दो, जनता दल (यूनाइटेड) का एक और तीन निर्दलीय विधायक हैं। एक सीट निवर्तमान विधायक के निधन से खाली है।
राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने शांति बहाल करने और सामान्य स्थिति वापस लाने के लिए कई कदम उठाए थे। इनमें सुरक्षा बलों से हथियार लूटने वालों से आत्मसमर्पण करने की अपील भी शामिल है।
मेइती और कुकी समुदायों के बीच जातीय हिंसा मई 2023 में तब शुरू हुई जब मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा देने की मांग का विरोध करने के लिए पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया गया। इस हिंसा में कम से कम से 260 लोगों की मौत हुई है जबकि हजारों लोग विस्थापित हुए हैं।
भाषा धीरज संतोष
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