डेली वर्ल्ड रिपोर्ट: सेंट्रल बैंक जोनल मैनेजर, रीजनल मैनेजर, सभी के खिलाफ मेरे पास है सबूत: पटनी शाखा मैनेजर
/Daily World
- 25 Jul 2024, 07:18 PM
- Updated: 07:18 PM
मुकेश कुमार त्रिपाठी, राहुल चौबे / डेली वर्ल्ड / रामगढ़वा / मोतिहारी
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया (सीबीआई) क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा पटनी शाखा प्रबंधक के विरुद्ध लगे आरोपों जैसे कि बैंक को नियत समय से पहले बंद करने और दुर्व्यवहार करने आदि की जांच कर उपभोगताओं से खेद व्यक्त करने के बाद मैनेजर विक्रम सिंह ने कहा है कि जोनल मैनेजर, पटना, रीजनल मैनेजर, मोतिहारी और अन्य लोग जो उनके पीछे पड़े हैं उन सभी के खिलाफ उनके पास सबूत है।
डेली वर्ल्ड अखबार द्वारा उनके ऊपर लगे आरोपों एवं पूर्व में हुए विजिलेंस केस के बारे में पूछने पर विक्रम सिंह ने कहा कि "यह एक गोपनीय डाटा है और जिसने भी यह जानकारी साझा की है उसके पीछे वह हाथ धोकर पड़ेंगे"। जिस-जिस ने यह "टेलेफोनिकली" जानकारी दी है मेरे पास उनके खिलाफ सारा सबूत है। अनिल अग्निहोत्री, जोनल मैनेजर और रीजनल मैनेजर जो मेरे पीछे पड़े हैं उन सभी का "प्रूफ" (सबूत) मेरे पास है।
दो दिन पहले सीबीआई मोतिहारी रीजनल मैनेजर नरेश ठाकुर ने पटनी शाखा प्रबंधक विक्रम सिंह द्वारा नियमों के विरुद्ध शीर्ष प्रबंधन द्वारा नियत समय से पहले ही बैंक बंद करने, ग्राहकों द्वारा इसका विरोध करने पर पुलिस बुलाने, उनसे दुर्व्यवहार करने तथा अन्य कई आरोपों की जांच के बाद ग्राहकों को हुए असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया था और भरोसा दिलाया कि भविष्य में उनके साथ ऐसा नहीं होगा। उन्होंने जांच के दौरान अपने सामने पटनी बैंक में लगे नोटिस बोर्ड पर विक्रम सिंह द्वारा लिखवाये गये कारोबारी समय को बदलवाकर सुबह 10 से दोपहर 3.30 बजे की जगह सुबह 10 से 4 बजे करा दिया था। डेली वर्ल्ड अखबार ने पटनी बैंक में लोगों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार के बारे खबर प्रकाशित किया था और यह भी उजागर किया कि विक्रम सिंह के खिलाफ पूर्व में ह्यकृषि लोनह्ण देने में गड़बड़ी करने के एक मामले के विजिलेंस जांच हो
चुकी है।
पूछे जाने पर पटनी मैनेजर विक्रम सिंह ने कहा कि 1947 में भारत आजाद हो गया था...एक व्यक्ति की कोई स्वतंत्रता होती है। मैं रिजाइन देकर लडूंगा। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा कृषि लोन देने में हुए अनियमिततों के बारे में विजिलेंस केस कोई बड़ा मामला नहीं है। "कुछ कॉन्फिडेंसिअल (गोपनीय) डाटा भी होता होगा...और इसके बारे में किसी को जानने का अधिकार नहीं है"।
विक्रम सिंह को शायद मालूम नहीं कि न केवल डेली वर्ल्ड बल्कि इस देश के प्रत्येक नागरिक को उनके खिलाफ विजिलेंस मामले और उनके हर कृत जो नियमों और बैंक दिशानिदेर्शों के खिलाफ है, के बारे में जानने का पूरा अधिकार है। सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया बैंकिंग कंपनी (उपक्रमों का अधिग्रहण और हस्तांतरण) अधिनियम, 1970 द्वारा गठित एक सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है। इसके 93.08 प्रतिशत शेयर सरकार के पास हैं। सरकार जनता द्वारा दिए टैक्स से चलती है और उनको तनख्वाह भी सरकार देती है। सरकारी संस्थाओं और उपक्रमों में काम करने वालों को अपने कर्तव्यों के प्रति पूर्ण रूप से जवाबदेह होना चाहिए।
सेंट्रल बैंक के वरिष्ठ प्रबंधन द्वारा उनके खिलाफ जांच करने और उनके द्वारा ग्राहकों से दुर्व्यवहार करने के मामले में खेद व्यक्त करने के बाद स्पष्ट है कि पटनी ब्रांच में मैनेजर के रूप में काम करते हुए उपभोगताओं के प्रति उनका रवैया ठीक नहीं रहा है। पटनी ब्रांच मैनेजर का यह कहना कि सेंट्रल बैंक जैसे एक सरकारी उपक्रम में काम करते हुए नियत समय से पहले बैंक बंद करना और कृषि लोन देने में गड़बड़ी करने के मामले में उनके खिलाफ विजिलेंस केस कोई बड़ा मामला नहीं है, बिलकुल गलत है। यह सबसे बड़ा मामला है और इसके बारे में हमें जानने का भी हक है और लिखने का भी।
नियत समय से पहले बैंक बंद करने का मामला गंभीर; आरबीआई, वित्त मंत्रालय तुरंत ले संज्ञान: हाईकोर्ट वकील
डेली वर्ल्ड / रामगढ़वा / मोतिहारी
ऐसे समय में जब की भारत सरकार समाज के सभी वर्गों, खास कर गरीब और पिछड़ों को वित्तीय समावेशन प्रदान करने के लिए सभी प्रयास कर रही है, पटनी सेंट्रल बैंक मैनेजर द्वारा हर रोज आधा घंटा पहले ही बैंक बंद कर देना और उसका विरोध करने पर ग्राहकों को पुलिस बुलाकर डराने का मामला एक गंभीर मामला है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के सर्कुलर (परिपत्र) एवं दिशा निदेर्शों के खिलाफ है।
बता दें कि आरबीआई जैसे सभी बड़े संगठनों ने ग्रामीण और कमजोर वर्ग के लोगों की बैंकिंग सुविधा के लिए पिछले कुछ सालों में कई सर्कुलर जारी किया है। अगर कोई शाखा प्रबंधक ऐसे इलाके में बैंक सर्कुलर और दिशा निदेर्शों के खिलाफ बैंक को समय से पहले बंद करता है और बैंक के गेट पर बैठ कर लोगों को आने से रोकता है तो राष्ट्रीय विकास की राह में इससे बड़ी कोई बाधा नहीं हो सकती है।
उच्च न्यायालय के वकील अमीश शर्मा ने कहा कि आरबीआई और वित्त मंत्रालय को इस मामले का तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और ऐसे अधिकारी एवं उनको संरक्षण देने वालों के खिलाफ तुरंत कार्यवाई करनी चाहिए। बैंक द्वारा ऐसा करने से न केवल गरीब और कमजोर वर्ग के लोग बैंकिंग प्रणाली से हतोत्साहित होंगे बल्कि यह उन्हें असंगठित बैंकिंग के दुष्चक्र में वापस फेंक देगा।