जाली हस्ताक्षर मामला : सीआईडी ने ममता के आवास, अभिषेक के कार्यालय की तलाशी ली
माधव
- 09 Jun 2026, 10:01 PM
- Updated: 10:01 PM
(तस्वीरों के साथ)
कोलकाता, नौ जून (भाषा) पश्चिम बंगाल के अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने विधायकों के कथित जाली हस्ताक्षर मामले की जांच के सिलसिले में मंगलवार को कोलकाता के कालीघाट इलाके में तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी के आवास और पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के कैमक स्ट्रीट स्थित कार्यालय की एक साथ तलाशी ली।
ममता का कालीघाट स्थित आवास तृणमूल कांग्रेस का केंद्रीय कार्यालय भी है।
सीआईडी के अधिकारियों ने कहा कि यह तलाशी पार्टी कार्यालय में छह मई को हुई बैठक की प्रस्ताव पुस्तिका की मूल प्रति और उपस्थिति शीट हासिल करने के लिए ली गई, जिस पर 70 विधायकों के हस्ताक्षर थे।
तलाशी के समय ममता और अभिषेक विपक्षी गठबंधन 'इंडिया' के नेताओं के साथ अपनी प्रस्तावित बैठकों के लिए शहर से बाहर दिल्ली में थे।
सीआईडी के मुताबिक, अभिषेक बनर्जी ने उक्त प्रस्ताव के आधार पर सबसे पहले नौ मई को पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष को सूचित किया था कि पार्टी ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को विधानसभा में विपक्ष के नेता, असीमा पात्रा और नयना बंद्योपाध्याय को उपनेता और फिरहाद हकीम को मुख्य सचेतक के रूप में चुना है।
सीआईडी के अनुसार, अभिषेक ने 20 मई को विधानसभा अध्यक्ष को पत्र भेजकर विभिन्न पदों के लिए नामित नेताओं के नामों की पुष्टि की, जिसमें उन्होंने बैठक की प्रस्ताव पुस्तिका और उपस्थिति शीट की प्रति भी संलग्न की।
तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित दो विधायकों-रीताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा-ने विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बोस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है कि छह मई को हुए बैठक में "विपक्ष के नेता के चयन के सिलसिले में कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था" और दोनों ने बैठक की प्रस्ताव पुस्तिका पर 19 मई को हस्ताक्षर किए थे।
दोनों विधायकों ने आरोप लगाया कि छह मई का प्रस्ताव "मनगढ़ंत और फर्जी" था। उन्होंने कहा कि 70 हस्ताक्षरों में से 14 हस्ताक्षर "बड़े अक्षरों" में थे।
सीआईडी ने 28 मई को कोलकाता पुलिस से मामले की जांच अपने हाथ में ले ली थी। उसने हरे स्ट्रीट पुलिस थाने में राज्य विधानसभा के प्रधान सचिव की शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किए जाने के एक दिन बाद यह कदम उठाया था।
सूत्रों ने कहा कि उक्त दस्तावेजों की बरामदगी के लिए मंगलवार को ली गई तलाशी अभिषेक के सीआईडी की ओर से पूछताछ के लिए जारी तीन समन की अनदेखी का परिणाम थी। एजेंसी ने तृणमूल नेता को फॉरेंसिक जांच के लिए अपने साथ मूल दस्तावेज लेकर आने का निर्देश दिया था।
सीआईडी ने अभिषेक से मंगलवार शाम पांच बजे तक उसके सामने पेश होने को कहा था। इससे पहले, एजेंसी ने उन्हें एक जून और आठ जून को मामले में पूछताछ के लिए तलब किया था।
सूत्रों के मुताबिक, सीआईडी अधिकारी कालीघाट पुलिस थाने की एक टीम और महिला पुलिस कर्मियों के साथ दोपहर में तृणमूल कांग्रेस के 30बी हरीश चटर्जी मार्ग स्थित केंद्रीय कार्यालय पहुंचे।
सूत्रों के अनुसार, 30बी हरीश चटर्जी मार्ग स्थित परिसर में सीआईडी टीम ने लगभग दो घंटे तलाशी ली, जबकि कैमक स्ट्रीट स्थित अभिषेक के कार्यालय को अधिकारियों ने करीब तीन घंटे तक खंगाला।
हालांकि, सूत्रों ने बताया कि तलाशी के दौरान दोनों परिसर से कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज नहीं जब्त किया गया।
सीआईडी टीम के पहुंचने की खबर फैलते ही तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कुणाल घोष और मदन मित्रा ममता के आवास पर पहुंचे, लेकिन उन्हें परिसर के अंदर जाने की इजाजत नहीं दी गई।
बाद में तृणमूल सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी मौके पर पहुंचे और सीआईडी अधिकारियों से बात की।
बनर्जी ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी तृणमूल सुप्रीमो को परेशान करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, "सीआईडी अधिकारी जानबूझकर उस दिन तलाशी के लिए ममता के आवास पहुंचे, जिस दिन वह शहर से बाहर हैं। सीआईडी की यह कार्रवाई कानून के अनुरूप नहीं है। सीआईडी टीम ने कहा कि चूंकि बैठक यहीं हुई थी और प्रस्ताव भी यहीं पारित किया गया था, इसलिए वह ममता के कार्यालय की तलाशी ले रही है। यह तर्क बेतुका है। यह बदले की राजनीति है।"
सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में जांच टीम को परिसर में प्रवेश करने की इजाजत नहीं दी गई, जिसके चलते कार्यालय के बाहर मौजूद सुरक्षाकर्मियों के साथ उसकी थोड़ी बहस हुई।
तृणमूल कांग्रेस के पूर्व सांसद शुभाशीष चक्रवर्ती ने कालीघाट परिसर में सीआईडी टीम के प्रवेश का इस आधार पर विरोध किया कि वह अभिषेक की गैरमौजूदगी में तलाशी की अनुमति नहीं देंगे और सहयोग देने के लिए अधिकारियों से 48 घंटे का समय मांगा।
चक्रवर्ती ने संवाददाताओं से कहा, "हम अभिषेक बनर्जी की गैरमौजूदगी में सीआईडी को परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं दे सकते। उनके (अभिषेक) आने के बाद सीआईडी परिसर की तलाशी ले सकती है।"
हालांकि, सूत्रों ने बताया कि दोपहर बाद स्थिति बदल गई, जब सीआईडी ने पुलिस की एक बड़ी टुकड़ी को बुलाया और वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों के "हल्के प्रतिरोध" के बावजूद परिसर में प्रवेश किया।
सूत्रों के मुताबिक, कालीघाट पुलिस थाने के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्हें कोलकाता पुलिस से संबद्ध सुरक्षाकर्मियों के साथ बहस करते देखा गया।
सूत्रों के अनुसार, अधिकारियों ने सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि वे जांच एजेंसी की ओर से चलाए जा रहे तलाशी अभियान में बाधा न डालें।
सूत्रों ने बताया कि इसके बाद सीआईडी टीम परिसर में दाखिल हुई और तलाशी एवं सत्यापन प्रक्रिया शुरू कर दी।
इस बीच, मामले की जांच के सिलसिले में सीआईडी की एक अन्य टीम कैमक स्ट्रीट स्थित अभिषेक के कार्यालय पहुंची।
सूत्रों ने बताया कि कार्यालय के कर्मचारियों ने सीआईडी टीम की तलाशी का विरोध करते हुए प्रवेश द्वार बंद कर दिया था, लेकिन बाद में जांचकर्ता परिसर में दाखिल होने में कामयाब हो गए।
यह मामला 19 मई को विधानसभा सचिवालय में जमा किए गए एक विवादास्पद पत्र से जुड़ा है, जिसमें शोभनदेब चट्टोपाध्याय को विपक्ष के नेता के रूप में नामित किया गया था। पत्र पर तृणमूल के लगभग 70 विधायकों के हस्ताक्षर होने की बात कही गई है।
हालांकि, बागी विधायकों रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा की शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि पत्र पर मौजूद कुछ हस्ताक्षर जाली थे, जिसके कारण प्राथमिकी दर्ज की गई और सीआईडी जांच शुरू की गई।
पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता के चयन को लेकर तृणमूल कांग्रेस में बगावत छिड़ गई है। संकट तब और बढ़ गया, जब तृणमूल कांग्रेस के 80 विधायकों में से 58 ने पार्टी नेतृत्व की अवहेलना करते हुए आधिकारिक उम्मीदवार शोभनदेब चट्टोपाध्याय के बजाय निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी का इस पद के लिए समर्थन किया।
पिछले हफ्ते बागी खेमे ने विधायक दल पर नियंत्रण हासिल कर लिया, रिताब्रता बनर्जी को विपक्ष का नेता चुना और विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता प्राप्त कर ली, जिसके परिणामस्वरूप 1998 में तृणमूल कांग्रेस के गठन के बाद से पार्टी में पहली बार विभाजन हुआ।
भाषा पारुल माधव
माधव
0906 2201 कोलकाता