यमुना को प्रदूषणमुक्त बनाने के लिए हरियाणा सरकार ने तेज की कवायद
माधव
- 09 Jun 2026, 04:32 PM
- Updated: 04:32 PM
चंडीगढ़, नौ जून (भाषा) हरियाणा के मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने यमुना और उसमें गिरने वाले नालों के पानी की गुणवत्ता में के लिए मंगलवार को संबंधित सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे मलजल शोधन, औद्योगिक-अपशिष्ट-प्रबंधन और प्रदूषण-नियंत्रण परियोजनाओं को लागू करने की गति में तेजी लायें।
मुख्य सचिव ने यहां एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की और उसमे उन्होंने यमुना एक्शन प्लान की प्रगति की समीक्षा की।
मुख्य सचिव ने कहा कि हरियाणा सरकार एक समन्वित, समय-बद्ध और तकनीक-आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से यमुना को स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने विभागों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि सभी जारी और प्रस्तावित परियोजनाएं 31 दिसंबर, 2027 तक पूरी हो जाएं।
समीक्षा में नए मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी), साझा दूषित जल शोधन संयंत्र (सीईटीपी), माइक्रो-एसटीपी और अपशिष्ट-टैपिंग बुनियादी ढांचे के विकास के माध्यम से यमुना जलग्रहण क्षेत्र में हो रही महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला गया।
हरियाणा सरकार ने यमुना की सफाई के लिए एक व्यापक कार्य योजना शुरू की है, जो मलजल-शोधन, औद्योगिक अपशिष्ट प्रबंधन और नालियों के प्रदूषण की निगरानी पर केंद्रित है।
हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विनय प्रताप सिंह ने बैठक में जानकारी दी कि 425 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रति दिन) से अधिक की अतिरिक्त मलजल शोधन क्षमता और 150 एमएलडी से अधिक की औद्योगिक अपशिष्ट शोधन क्षमता वाली परियोजनाएं निविदा, मंजूरी और कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
चर्चा की गई प्रमुख पहलों में पानीपत के जट्टल रोड पर मौजूदा 10-एमएलडी एसटीपी को अद्यतन करना शामिल था, जिससे घरेलू मलजल और औद्योगिक अपशिष्ट दोनों का शोधन हो सकेगा। करनाल जिले के गांवों में छह माइक्रो-एसटीपी स्थापित करने की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। उम्मीद है कि इस कदम से नालियों में बिना शोधन किए गए ग्रे-वॉटर (घरेलू अपशिष्ट जल) के बहाव में काफी कमी आएगी।
सोनीपत में नाथूपुर और कुंडली में प्रस्तावित सामूहिक अपशिष्ट शोधन संयंत्रों (सीईटीपी) तथा राठधना स्थित मलजल शोधन संयंत्र (एसटीपी) की क्षमता बढ़ाने की परियोजनाओं से तेजी से विकसित हो रहे औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों में अपशिष्ट जल शोधन ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
बैठक में गुरुग्राम और फरीदाबाद में प्रस्तावित सीईटीपी परियोजनाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई, जिनमें प्रतापगढ़, मिर्जापुर और गुरुग्राम के औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।
मुंगेशपुर नाले पर विशेष ध्यान दिया गया, जहां बिना उपचारित अपशिष्ट जल को शोधन सुविधाओं की ओर मोड़ा जा रहा है तथा दिल्ली में प्रवेश करने से पहले नाले के पानी की गुणवत्ता में सुधार के लिए जैव-उपचार (बायो-रिमेडिएशन) उपायों की योजना बनाई जा रही है।
अधिकारियों ने बताया कि प्रमुख नालों में चिन्हित अपशिष्ट जल निकास बिंदुओं को व्यवस्थित रूप से जोड़ा जा रहा है, ताकि बिना उपचारित अपशिष्ट प्राकृतिक जल निकायों तक न पहुंच सके।
मुख्य सचिव ने विभागों को सभी एसटीपी और सीईटीपी में अपशिष्ट जल उत्सर्जन मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया तथा नियमित निगरानी के महत्व पर जोर दिया।
भाषा
राखी माधव
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