हाईकोर्ट के न्यायाधीश के पहल पर अधिवक्ता ओं ने ली हड़ताल वापस; न्यायिक मैजिस्ट्रेट मामल े में गतिरोध अब भी जारी

सागर सूरज / मोतिहारी

जिला बार एसोशिएशन ने मंगलवार को अपनी अनिश्चित कालीन हड़ताल को वापस ले ली है, बावजूद इसके बार और बेंच के बीच जारी गतिरोध अभी भी गत चार दिनों से जारी है। अधिवक्ताओं के हड़ताल एवं सभी कोर्ट के बहिष्कार करने की घोषणा पर संध ने पुनः विचार करते हुए बुधवार से अपने–अपने काम पर वापस आने का निर्णय लिया है, वहीं न्यायिक मैजिस्ट्रेट सुश्री कुमारी ज्योत्सना के कोर्ट का बहिष्कार अब भी जारी है।

अधिवक्ताओं ने न्यायिक मैजिस्ट्रेट सुश्री ज्योत्सना द्वारा कथित रूप से एक अधिवक्ता सियावर शरण तिवारी के पैर पर अपनी गाड़ी चढ़ा कर कुचलने के प्रयास के आरोप के बाद सभी कोर्ट के अनिश्चितकालीन बहिष्कार का निर्णय लिया था। अधिवक्ताओं का आरोप है कि जब तक उक्त मैजिस्ट्रेट को नामजद करते हुये प्राथमिकी नहीं दर्ज कि जाती तब तक हड़ताल जारी रहेगा।

जिला बार असोशिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिरुद्ध प्रसाद सिंह ने बताया कि हाई कोर्ट के इंस्पेक्टिंग जज चक्रधारी शरण सिंह के बात करने एवं अधिवक्ताओं की एक कमिटी के आपसी सहमति के बाद संध ने अपनी हड़ताल वापस ले ली है। वहीं अधिवक्ता नरेंद्र देव ने कहा कि ज़िले के जिला एवं सत्र न्यायाधीश कृष्ण शंकर सेंगर अधिवक्ताओं के आम सभा में शामिल हो कर गतिरोध को दूर करने की अपील की।

स्टेट बार काउंसिल के को-चेयर मैन राजीव कुमार द्विवेदी ने कहा कि गतिरोध को दूर करने के मद्देनजर उच्च न्यायलय के माननिय जज के साथ हुये मीटिंग मे उनके अलावा संध के अध्यक्ष शेष नारायण कुँवर, कामेश्वर प्रसाद सिन्हा, कन्हैया प्रसाद सिंह एवं प्रहलाद शरण आदि शामिल थे।

बताया गया कि उच्च न्यायलय के मननिए जज श्री सिंह सबसे पहले मोतिहारी आकर घायल अधिवक्ता श्री तिवारी से मिले और इलाज में प्रत्येक तरह की मदद मुहैया करवाने का आश्वाशन देने के बाद अधिवक्ताओं के एक प्रतिनिधि से मिले एवं मामले में उचित कार्रवाई करने की बात कही।

वहीं वरीय अधिवक्ता राजीव शंकर वर्मा ने बताया कि सुश्री कुमारी ज्योत्सना के कोर्ट का बहिष्कार प्राथमिकी दर्ज होने तक जारी रहेगा। अधिवक्तों के सम्मान से कोई समझौता संभव नहीं है।

मालूम हो कि अधिवक्ताओं का आरोप है कि जुड़ीशियल मैजिस्ट्रेट के गाड़ी से अधिवक्ता तब बुरी तरह से घायल हो गए जब अधिवक्ता अपने मोवक्किल के काम के लिए दूसरे कोर्ट में जा रहे थे। घायल अधिवक्ता ने पुलिस को दिये अपने आवेदन मे आरोप लगाया कि महिला मैजिस्ट्रेट से उन्हें पूर्व में भी किसी मुकदमे के सिलसिले में कहा सुनी हुई थी, जिसमें उनके साथ दुर्व्यवहार हुआ था।
बता दें कि पुलिस अधीक्षक उपेंद्र शर्मा ने अधिवक्ता के प्राथमिकी वाले आवेदन को उच्च न्यायालय के अनुमोदन हेतु भेज दिया, उसके बाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश मामले के जांच करने हेतु मोतिहारी पहुँचे।

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