झमाझम बारिश से किसानों के खिले चेहरे; शहरी क्षेत्र के लोगों का जीवन अस्त-व्यस्त

नीरज आनंद / मोतिहारी

रविवार की शाम से ही प्रभु की कृपा बारिश बन कर बरस रही है। जिले में मानसून की इतनी सक्रियता बढ़ने से किसानों के चेहरे खिल खिला उठे हैं। बारिश का पानी खेतों में भरने से धान की रोपनी भी शुरू हो गया है। मानसून की झमाझम बारिश से किसान काफी खुश हैं। वे लंबे समय से मानसून की बारिश का इंतजार कर रहे थे। कहीं-कहीं वैसे जगह जहां धान के बीचड़े तैयार हैं। वहां रोपनी का कार्य भी शुरू हो गया है।
जिले में मानसून की झमाझम बारिश से निराश किसानों में खुशी की लहर दौड़ी है। किसान सोमवार की सुबह से ही ट्रैक्टर लेकर खेतों में निकल गए। जिन किसानों ने रोहणी नक्षत्र में धान का बीज डाला था। उसके बीचड़े की रोपाई शुरू हो गई है। वहीं मौसम के मार से जो बीचड़े बढ़ रहे थे। लगातार बारिश से उन पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। बड़े ही तेजी के साथ वे ग्रोथ करेंगे। कृषि अधिकारियों का कहना है कि जिले में एक लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है। हालांकि इस बार यह रकबा कुछ कारणों से घट कर 90 हजार हेक्टेयर पर आ गया है। इस बार मानसून की बरसात विलंब से होने के कारण किसानों को थोड़ी परेशानी हुई है। सामान्यत: जिले में 14 जून से मानसून सक्रिय हो जाता है। लेकिन इस बार जिले में 22 जून के बाद मानसून की बारिश शुरू हुई है। हालांकि पूर्व में भी हल्की बारिश होती रही है। जिससे किसान धान की रोपनी नहीं कर पा रहे थे। लेकिन पिछले दो दिनों में जिला मुख्यालय समेत पूरे ग्रामीण इलाके में झमाझम बारिश होने से धान की रोपाई शुरू हो गई है। जिन इलाकों में थोड़ी कम बारिश हुई है या फिर बीचड़े तैयार नहीं हैं,वहां किसान अभी इंतजार में हैं।

बारिश से जन जीवन रहा अस्त-व्यस्त

रविवार के शाम से हो रहे बरसात से एक तरफ जहां किसानों में खुशियों का ठिकाना नहीं रहा, वहीं दूसरी ओर शहरी क्षेत्र में लोगों के जीवन पर इसका विपरित असर देखने को मिला। लोगों को अपने दैनिक कार्यों के लिए घरों से बाहर निकलने में काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि बारिश छात्रों व विभिन्न विभागों के कर्मचारियों को उनके दिनचर्या से नहीं रोक पायी। सड़कों पर छात्र व अपने कार्य पर जाने के लिए लोगों को छाता, बरसाती या अन्य साधनों के सहारे देखे गये।

शहर में जगह-जगह लग रहा है पानी, नाली जाम

पूरे शहर में जगह-जगह पानी लगा रहा। कहीं-कहीं तो गलियों में झील की स्थिति अब भी बनी हुई है। स्थानीय लोगों की मानें तो पिछले कई वर्षों से वहां की स्थिति ऐसे ही बनी हुई है। जब भी बरसात का समय आता है। स्थानीय इसके लिए जनप्रतिनिधियों तथा अधिकारियों से गुहार लगाते हैं। वहीं उनके द्वारा आश्वासन तो दिया जाता है। लेकिन बरसात के साथ ही उनके स्मृति पटल से उनकी समस्या भी समाप्त हो जाती है। कुछ ऐसा ही नजारा है शहर के राजेन्द्र नगर, स्पोर्ट्स क्लब रोड, अगरवा, चाँदमारी, बढ़ई टोला, अमृत मध्य विद्यालय रोड, पतौरा सहित अन्य जगहों पर जलजमाव देखा जा सकता है।

किसानों ने कहा…
बरकुरवा (देहात) के किसान नारद पासवान, रायसिंघा के रामबहादुर पासवान उर्फ भगत जी, गजपुरा के रुपेश सिंह तथा अन्य किसानों ने बताया यह बारिश हम सभी किसानों के हित में हुआ है। बारिश नहीं होने से बीचड़े मुरझा रहे थे। खेती का काम पीछे हो रहा था। यह बारिश हम लोगों को धान के रोपनी करने के लिए बहुत कारगर साबित हो रही है। यदि इसी तरह से बारिश होती रहेगी तो इस वर्ष अच्छे फसल उत्पादन के अनुमान हो सकते हैं। / डेली वर्ल्ड /

फोटो – धान फसल की रोपनी करते किसान

Leave a Reply

*